मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रेलवे कॉलोनी में रविवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब लोगों ने एक दुर्लभ प्रजाति का सांप देखा। यह सांप देखने में सामान्य नहीं था और इसकी बनावट को देखकर लोग घबरा गए। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल गई कि यह वही ‘रेड सैंड बोआ’ है, जिसे कई जगहों पर ‘दोमुंहा सांप’ भी कहा जाता है। डर के माहौल में लोगों ने तुरंत इसकी सूचना सर्प मित्र अमिता श्रीवास को दी। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचीं और काफी सावधानी के साथ सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया। बाद में वन विभाग को इसकी जानकारी दी गई, जिसने मौके पर पहुंचकर पूरे मामले को अपने नियंत्रण में लिया। सांप को जांच के बाद सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
‘दोमुंहा सांप’ नाम के पीछे की सच्चाई
रेड सैंड बोआ को अक्सर लोग गलतफहमी में ‘दोमुंहा सांप’ कह देते हैं, जबकि इसकी पूंछ का आकार सिर जैसा मोटा और गोल होने के कारण यह भ्रम पैदा होता है। खतरे की स्थिति में यह अपनी पूंछ को ऊपर उठाकर सिर जैसा आकार दिखाता है, जिससे शिकारी भ्रमित हो जाते हैं। यह सांप पूरी तरह जहरीला नहीं होता और इसे मानव के लिए खतरनाक नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रकृति में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह खेतों में चूहों और छोटे कीटों को खाकर उनकी आबादी नियंत्रित करता है। इसी कारण इसे ‘किसानों का मित्र’ भी कहा जाता है। यह प्रजाति आमतौर पर रेतीले और सूखे इलाकों में पाई जाती है और जमीन के अंदर बिल बनाकर रहना पसंद करती है।
2 से ढाई करोड़ की कीमत
इस सांप को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसकी कथित अंतरराष्ट्रीय कीमत को लेकर है, जिसे कई जगहों पर 2 से ढाई करोड़ रुपये तक बताया जाता है। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञ इसे पूरी तरह अफवाह और अंधविश्वास बताते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इसके शरीर में रहस्यमयी औषधीय गुण होते हैं, जिससे कॉस्मेटिक और गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर की दवाएं बनाई जाती हैं। वहीं कुछ मान्यताओं में यह भी कहा जाता है कि इसके पेट में विशेष प्रकार की थैली पाई जाती है, जो इसे अत्यधिक मूल्यवान बनाती है। इन्हीं गलत धारणाओं के कारण इस सांप की अवैध तस्करी की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञ साफ करते हैं कि इन दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और यह केवल भ्रम और लालच पर आधारित अवैध कारोबार को बढ़ावा देते हैं।
वन विभाग की कार्रवाई
रेड सैंड बोआ भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल है, और इसके शिकार, बिक्री या तस्करी पर सख्त कानूनी प्रतिबंध है। कटनी में मिले इस सांप को वन विभाग की टीम ने पूरी जांच के बाद सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया। डिप्टी रेंजर के अनुसार, सांप पूरी तरह स्वस्थ पाया गया और उसे शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया, ताकि वह अपने सामान्य जीवन चक्र को जारी रख सके। सर्प मित्र अमिता श्रीवास ने भी बताया कि ऐसे जीवों को लेकर समाज में फैले अंधविश्वास को खत्म करना बेहद जरूरी है। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि आम लोगों की भी जिम्मेदारी है, ताकि प्रकृति का संतुलन बना रहे।
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