मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर शुक्रवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। शुरुआती जानकारी में करीब 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी, जबकि बाद की पुलिस जानकारी के अनुसार संख्या 500 से ज्यादा पहुंच गई। हिरासत में लिए गए लोगों में आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज, आतिशी और संजीव झा समेत छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों की मांगों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल शामिल हैं।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, 11 मेट्रो स्टेशन प्रभावित
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हटाना शुरू किया। नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए हैं। प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था के चलते 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास पर भी पाबंदी लगाई गई। इस दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में आवाजाही प्रभावित रही।
मुंबई में CJP ने खोला मोर्चा
इसी मुद्दे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुंबई के शिवाजी पार्क से अपना आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया था। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आंदोलन की घोषणा की है। मुंबई पुलिस ने पहले प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था, लेकिन CJP ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। संगठन ने अपने अभियान को आगे देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की भी घोषणा की है।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर उठाए जा रहे सवाल
दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों के पीछे मतदाता सूची के SIR को लेकर प्रदर्शनकारियों की आपत्तियां प्रमुख मुद्दा हैं। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर SIR प्रक्रिया को मतदाता सूची को अपडेट करने और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया बताया है। ऐसे में फिलहाल विवाद का केंद्र चुनावी सूची के पुनरीक्षण, आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उठाई जा रही मांगें हैं।







