देश के नाम संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिला आरक्षण बिल को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने का ऐतिहासिक प्रयास है। PM मोदी ने कहा कि सरकार की नीयत पूरी तरह साफ है और यह कदम महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भले ही इस रास्ते में रुकावटें आई हों, लेकिन सरकार पीछे हटने वाली नहीं है।
‘नारी शक्ति के लिए महायज्ञ’—PM मोदी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण बिल को “नारी शक्ति वंदन” का महायज्ञ बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से लंबित इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाया है। पीएम मोदी के मुताबिक, यह संशोधन 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी फैसला है। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को नए अवसर देगा, उन्हें आगे बढ़ने का मंच देगा और उनके सामने मौजूद बाधाओं को हटाने का काम करेगा।
विपक्ष पर तीखा हमला
अपने भाषण में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों—कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके—पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये पार्टियां महिला सशक्तिकरण के खिलाफ हैं और जानबूझकर इस बिल का विरोध कर रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जब महिलाओं के अधिकारों की बात आई, तब ये दल खुशी मना रहे थे, जो नारी सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने इसे “नारी के आत्मसम्मान पर चोट” करार दिया और कहा कि जनता इस व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करेगी।
‘विपक्ष को मिलेगी सजा’—PM का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि 21वीं सदी की महिलाएं जागरूक हैं और हर राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रख रही हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों को जनता जवाब जरूर देगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि विपक्ष ने न केवल महिलाओं के अधिकारों का विरोध किया, बल्कि संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश की नारी शक्ति आने वाले समय में सही फैसला लेगी और सशक्त भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएगी।
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