PM मोदी ने बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के जन्मदिन पर ऐसा क्या लिखा? जिस पर टिकी दुनिया की नजर

14वें दलाई लामा के 91वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि दलाई लामा ने पूरी दुनिया को शांति, करुणा और सद्भाव का संदेश दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा कि दलाई लामा की नैतिक शक्ति, आध्यात्मिक सोच और मानवता की सेवा के प्रति उनका समर्पण करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका जीवन लोगों को आपसी भाईचारे और अहिंसा का रास्ता अपनाने की सीख देता है। पीएम का यह संदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि दलाई लामा का मुद्दा लंबे समय से वैश्विक राजनीति और कूटनीति से जुड़ा रहा है।

शिमला से लेकर दुनिया के कई देशों में हुए विशेष कार्यक्रम

दलाई लामा के जन्मदिन पर भारत समेत कई देशों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित दोरजे ड्रैक मठ में तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने विशेष प्रार्थना सभाएं कीं। इन कार्यक्रमों में दलाई लामा के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और विश्व शांति की कामना की गई। बड़ी संख्या में तिब्बती समुदाय के लोग और अनुयायी इन आयोजनों में शामिल हुए। हर साल की तरह इस बार भी सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने अलग-अलग देशों में कई सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए। हालांकि इस बार दलाई लामा स्वास्थ्य कारणों से किसी बड़े सार्वजनिक समारोह में शामिल नहीं हो सके।

कौन हैं दलाई लामा और भारत से उनका क्या रिश्ता है?

दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को तिब्बत के ताकस्टर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम ल्हामो थोंडुप था। जब वे करीब दो साल के थे, तब उन्हें 13वें दलाई लामा का पुनर्जन्म माना गया। इसके बाद उन्हें तिब्बत की राजधानी ल्हासा ले जाया गया और बाद में आध्यात्मिक गुरु के रूप में उनकी औपचारिक ताजपोशी हुई। साल 1959 में तिब्बत में हालात बिगड़ने के बाद उन्हें हजारों तिब्बती लोगों के साथ भारत आना पड़ा। तब से भारत ही उनका निवास स्थान है। यहां रहते हुए उन्होंने पूरी दुनिया में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाया। भारत और तिब्बती समुदाय के बीच उनका विशेष स्थान आज भी कायम है।

स्वास्थ्य लाभ के बाद लद्दाख जाने की तैयारी

दलाई लामा के कार्यालय के अनुसार, कुछ समय पहले दिल्ली में उनके बाएं घुटने का सफल रिप्लेसमेंट ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टरों की सलाह पर वह अभी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और जल्द ही उनके लद्दाख दौरे की भी योजना है। वहीं, उनके जन्मदिन के अवसर पर चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों में पर्यावरण संरक्षण, अधिक से अधिक पौधे लगाने और तिब्बती भाषा व संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। इन अभियानों का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों तक दलाई लामा के करुणा, शांति और मानवता के संदेश को पहुंचाना है। उनके अनुयायियों का मानना है कि यही उनके जीवन की सबसे बड़ी सीख है।

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