“मैं बच गया, लेकिन…”: हमले के बाद पप्पू यादव का छलका दर्द, बोले— ‘अब जान पर खतरा’

बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के नई दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब एक पत्रकार वार्ता के दौरान अचानक विवाद बढ़ गया। सांसद पप्पू यादव अपने हालिया संसद प्रदर्शन और उस पर उठे तमाम राजनीतिक विवादों को लेकर मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे थे। शुरुआत में यह मामला केवल तीखे सवालों और बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोधी पक्ष के लोगों द्वारा नारेबाजी शुरू किए जाने के बाद दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते वहां कुर्सियां तक फेंकी जाने लगीं।

चप्पल फेंकने और चाकू होने का गंभीर आरोप

हंगामे के इस माहौल के बीच एक युवक ने कथित तौर पर सांसद पप्पू यादव पर चप्पल से हमला कर दिया। घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद उनके समर्थकों ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को दबोच लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी युवक को अपनी हिरासत में ले लिया और उसे थाने ले गई। इस पूरी घटना के बाद प्रेस कांफ्रेंस स्थल पर कुछ देर के लिए पूरी तरह से सन्नाटा और तनाव का माहौल छा गया था।

“मुझे मारने की थी साजिश, लेकिन मैं बच गया”

घटना के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद पप्पू यादव ने बेहद सनसनीखेज आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके घर में घुसकर उन पर हमला किया गया है और यह उनकी हत्या की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था। पप्पू यादव ने कहा कि हमलावर के हाथ में चाकू भी था और उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने बयान देते हुए कहा कि लगातार लोग उन्हें खत्म करने की बातें कर रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है, हालांकि इस बार वह बाल-बाल बच गए हैं।

राम मंदिर चंदा चोरी के प्रदर्शन से जुड़ा है पूरा विवाद

गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को ही सांसद पप्पू यादव ने संसद परिसर में अनोखा प्रदर्शन करते हुए गेरुआ वस्त्र धारण किया था। उन्होंने यह प्रदर्शन राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामलों को उजागर करने और विरोध दर्ज कराने के लिए किया था। उनके इस प्रदर्शन के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सहित कई अन्य राजनीतिक दलों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। इसी पूरे मामले पर सफाई देने और अपना पक्ष जनता के सामने रखने के लिए उन्होंने अपने दिल्ली आवास पर यह प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी, जो अंततः बड़े विवाद और हंगामे में तब्दील हो गई।

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