सिंधु नदी का पानी रुकते ही युद्ध पर उतरा पाकिस्तान! गीदड़भभकी मिलते ही भारत ने लिया वो फैसला, जिससे हिल गया इस्लामाबाद

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल किया और इस संधि को स्थगित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। नई दिल्ली ने साफ और कड़े शब्दों में इस्लामाबाद को संदेश दे दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत के इस सख्त कदम ने पाकिस्तान के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि पानी के संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की गीदड़भभकी और भारत का करारा पलटवार

भारत के इस फैसले से बौखलाए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए युद्ध का राग अलापना शुरू कर दिया है। एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि पानी पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है और अगर भारत ने सिंधु नदी की धारा को रोकने की कोशिश की, तो वे सैन्य कार्रवाई और भारत के खिलाफ युद्ध की राह पर जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। पाकिस्तान की इस खोखली धमकी पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बेहद सख्त और करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान ऐसे मनगढ़ंत और भड़काऊ बयान केवल अपनी घरेलू नाकामियों को छिपाने और वहां हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए दे रहा है।

पीओके (PoK) में लगी आग और पाकिस्तानी सरकार की बर्बरता बेनकाब

भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस विवाद के बीच दुनिया का ध्यान पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सुलग रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर खींचा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान सरकार की बर्बरता को उजागर करते हुए कहा कि पीओके में पिछले कई दशकों से आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों का हनन और आम नागरिकों का दमन किया जा रहा है, जिसके कारण वहां की जनता सड़कों पर है। अपनी ही जनता की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन ने पुलिसिया बर्बरता की सारी हदें पार कर दी हैं। वहां इंटरनेट बंद कर दिया गया है, जरूरी दवाओं और राशन की सप्लाई रोक दी गई है और निहत्थे नागरिकों पर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं। भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान अपनी इस हैवानियत को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है।

अवैध ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ का ड्रामा और 1960 की संधि का भविष्य

यह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी मोर्चे पर भी भारत ने पाकिस्तान को पछाड़ दिया है। 15 मई 2026 को तथाकथित ‘कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ द्वारा सिंधु जल संधि की व्याख्या और जल भंडारण क्षमता को लेकर एकतरफा फैसला सुनाया गया था, जिसे भारत ने पूरी तरह अवैध बताते हुए खारिज कर दिया है। भारत का मानना है कि इस मध्यस्थता अदालत का गठन ही नियमों के खिलाफ जाकर किया गया था, इसलिए इसका कोई भी फैसला भारत पर लागू नहीं होता। 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षरित यह संधि दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का मुख्य जरिया रही है, लेकिन पाकिस्तान के लगातार धोखे और आतंकवाद को पनाह देने की नीति ने अब इस संधि के भविष्य पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। भारत के रुख से साफ है कि अब बात सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की होगी।

Read more-टीम इंडिया की जर्सी मिलते ही भावुक हुआ 15 साल का खिलाड़ी, फिर जो किया उसने जीत लिया करोड़ों दिलों का भरोसा

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img