NSA Ajit Doval: संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को उस समय राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल अचानक संसद भवन पहुंचे। उस समय लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही थी, जबकि विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी कर दी गई थी। डोभाल के संसद पहुंचने की खबर सामने आते ही कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे किसी बड़े सुरक्षा मुद्दे से जोड़कर देखा, तो कुछ ने अनुमान लगाया कि वह सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ किसी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने आए हैं। हालांकि, शुरुआती अटकलों के बीच कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी।
सुरक्षा बैठक की चर्चाओं के बीच क्या निकली सच्चाई?
अजीत डोभाल के संसद पहुंचने के बाद राजनीतिक और मीडिया गलियारों में कई तरह के कयास लगाए गए। चर्चा होने लगी कि क्या देश की सुरक्षा से जुड़े किसी नए घटनाक्रम पर सरकार को जानकारी दी जानी है या फिर संसद में किसी संवेदनशील विषय पर विचार-विमर्श होने वाला है। लेकिन बाद में सामने आई जानकारी के अनुसार उनका संसद दौरा किसी आपात स्थिति या विशेष सुरक्षा इनपुट से जुड़ा नहीं था। सूत्रों के मुताबिक यह एक सामान्य और नियमित दौरा था। यानी उनके संसद पहुंचने के पीछे किसी बड़े सुरक्षा संकट या आपात बैठक जैसी बात नहीं थी। इससे पहले फैली तमाम अटकलों पर भी विराम लग गया।
एंटी पेपर लीक बिल के बीच बढ़ी थी उत्सुकता
जिस समय अजीत डोभाल संसद पहुंचे, उसी दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल को लेकर चर्चा चल रही थी। विपक्ष इस विधेयक सहित कई अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा था। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए रोकनी भी पड़ी। ऐसे माहौल में देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का संसद पहुंचना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने लगा। यही वजह रही कि सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके दौरे को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके दौरे का संसद में चल रही बहस या किसी राजनीतिक विवाद से सीधा संबंध नहीं था।
अफवाहों पर लगी रोक, सामान्य दौरा बताया गया
सूत्रों के अनुसार अजीत डोभाल का संसद दौरा पूरी तरह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था। इसे किसी विशेष सुरक्षा अलर्ट, गोपनीय बैठक या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तत्काल फैसले से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राजनीतिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि संसद सत्र के दौरान कई बार वरिष्ठ अधिकारी और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग नियमित कामकाज के सिलसिले में संसद आते हैं। ऐसे दौरों को हर बार किसी बड़े घटनाक्रम से जोड़ना उचित नहीं होता। फिलहाल सरकार की ओर से भी ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है कि डोभाल की मौजूदगी किसी असाधारण स्थिति से जुड़ी थी। ऐसे में स्पष्ट है कि संसद में उनकी मौजूदगी ने भले ही कुछ समय के लिए चर्चाओं को जन्म दिया हो, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह केवल एक नियमित और पूर्व निर्धारित दौरा था।
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