लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और युवाओं के भविष्य के साथ न्याय न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्र लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की उम्मीद करते हैं, लेकिन बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक के मामलों ने उनका भरोसा कमजोर किया है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि यदि पहले से ही पेपर लीक रोकने के लिए कानून मौजूद था, तो फिर नई व्यवस्था लाने की जरूरत क्यों महसूस हुई। उनका कहना था कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहले बनाए गए कानून का असर जमीन पर क्यों नहीं दिखाई दिया।
युवाओं के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों का मुद्दा भी उठा
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि युवाओं की बढ़ती नाराजगी किसी भी सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। उन्होंने कहा कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही देश के विकास की सबसे बड़ी नींव होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जिससे गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। उन्होंने शिक्षक भर्ती, विशेषकर 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले का भी जिक्र करते हुए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके अलावा उन्होंने माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति और उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े मुद्दे भी सदन में रखे। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो इसका सबसे अधिक असर गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों पर पड़ेगा।
किरेन रिजिजू का पलटवार, आपातकाल से लेकर आंदोलन तक हुई बहस
अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कानून बनाना और संसद के माध्यम से समाधान निकालना सही रास्ता है, न कि ऐसे हालात पैदा करना जिनकी तुलना आपातकाल से की जाए। रिजिजू के इस बयान के बाद सदन का माहौल और गर्म हो गया। जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन हाल के कुछ आंदोलनों के दौरान जिस तरह की सुरक्षा व्यवस्था और कार्रवाई देखने को मिली, उसने कई सवाल खड़े किए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ हुए व्यवहार का भी उल्लेख किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज को सम्मान मिलना चाहिए। दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर कई बार तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।
नीट, पेपर लीक और विश्वविद्यालयों पर भी सरकार से जवाब मांगा
बहस के दौरान अखिलेश यादव ने बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं और नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है और सरकार को इस दिशा में सख्त और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने परीक्षा से जुड़े विवादों में प्रभावित छात्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मुआवजे की मांग भी दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश की मौलाना जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया और राज्य में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थिति पर भी सवाल किए। दूसरी ओर सरकार ने भरोसा दिलाया कि एंटी पेपर लीक बिल का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना है ताकि भविष्य में युवाओं का विश्वास मजबूत हो सके। अब इस बहस के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि नया कानून लागू होने के बाद पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितना प्रभावी नियंत्रण हो पाता है।
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