छत्तीसगढ़ का बस्तर, जो कभी नक्सली हिंसा और बारूदी सुरंगों के कारण पूरे देश में चर्चा में रहता था, अब तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रहा है। केंद्र सरकार बस्तर को ‘नक्सल मुक्त और विकास युक्त’ क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी में जुटी है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 18 और 19 मई को दो दिवसीय दौरे पर बस्तर पहुंचेंगे। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि संसद में ‘नक्सल मुक्त भारत’ का संकल्प सामने आने के बाद यह उनका पहला बस्तर दौरा होगा। सरकार अब सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास को सबसे बड़ा हथियार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। लंबे समय तक नक्सल प्रभाव झेल चुके दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और बीजापुर जैसे इलाकों में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंटरनेट जैसी सुविधाओं को तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
गांव-गांव पहुंचेगी सरकार, जन सुविधा केंद्र होंगे बड़ा हथियार
गृह मंत्री के दौरे के दौरान कई अहम योजनाओं की शुरुआत भी होने जा रही है। अमित शाह रायपुर में डायल-112 सेवा के नए वाहनों को हरी झंडी दिखाएंगे, जिससे दूरदराज के इलाकों में पुलिस प्रतिक्रिया व्यवस्था और मजबूत होगी। इसके बाद वे बस्तर के नेतानार में जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन करेंगे। सरकार का दावा है कि इन केंद्रों के जरिए आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक सीधे सरकारी योजनाओं की पहुंच बनाई जाएगी। राशन, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी सेवाएं अब लोगों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी है। जिन इलाकों में कभी सरकारी कर्मचारी जाने से डरते थे, वहां अब प्रशासनिक और डिजिटल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस परियोजना का फायदा कोंडागांव, जगदलपुर, नारायणपुर और आसपास के कई गांवों को मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भरोसा और विकास साथ-साथ बढ़ाना सबसे जरूरी होता है और सरकार इसी मॉडल पर आगे बढ़ रही है।
शहीद जवानों को श्रद्धांजलि, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से भी संवाद
दौरे के दौरान गृह मंत्री जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर नक्सल विरोधी अभियानों में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देंगे। पिछले कई वर्षों में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस के कई जवानों ने बस्तर में अपनी जान गंवाई है। बताया जा रहा है कि अमित शाह शहीद परिवारों से मुलाकात कर सकते हैं और सुरक्षा बलों के जवानों के साथ भी संवाद करेंगे। इसके अलावा आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों और स्थानीय लोगों से बातचीत का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। सरकार अब पुनर्वास नीति के जरिए पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने पर जोर दे रही है। वहीं 18 मई की शाम जगदलपुर की बादल अकादमी में ‘बस्तर के संग’ लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें आदिवासी संस्कृति और लोक कला को राष्ट्रीय पहचान देने की कोशिश की जाएगी। सरकार इसे बस्तर की नई सकारात्मक छवि बनाने की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
19 मई की बैठक से तय होगी बस्तर के भविष्य की नई रणनीति
इस दौरे का सबसे अहम कार्यक्रम 19 मई को जगदलपुर में होने वाली केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक मानी जा रही है। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami शामिल होंगे। बैठक में आंतरिक सुरक्षा, राज्यों के बीच समन्वय, सड़क और स्वास्थ्य परियोजनाओं, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। केंद्र सरकार अब बस्तर को देश के सामने ‘सुरक्षा से विकास’ के सफल मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है। आने वाले समय में यहां पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं की शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक तौर पर भी यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार यह संदेश देना चाहती है कि अब बस्तर में डर नहीं, बल्कि विकास और विश्वास का नया दौर शुरू हो चुका है।
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