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अब नहीं मिलेगी आसानी से अगली तारीख! सुप्रीम कोर्ट के नए नियम से मची हलचल

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने के नियम सख्त किए, अब ‘तारीख पर तारीख’ नहीं चलेगी। जानें नए नियम, एडजर्नमेंट की प्रक्रिया और किन हालात में मिलेगी अगली तारीख।

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सुप्रीम कोर्ट

 

देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने अब अदालतों में बार-बार सुनवाई टालने की आदत पर सख्त रुख अपना लिया है। 18 मार्च को जारी नए सर्कुलर में कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब बिना ठोस कारण के किसी भी मामले में ‘एडजर्नमेंट’ यानी अगली तारीख लेना आसान नहीं होगा। लंबे समय से न्याय प्रक्रिया में देरी की बड़ी वजह माने जाने वाले इस ट्रेंड पर लगाम लगाने के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। नए नियमों के लागू होने के बाद अदालतों में मामलों की सुनवाई तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 रेगुलर मामलों में अब कोई छूट नहीं

नए सर्कुलर के तहत सबसे सख्त नियम ‘रेगुलर मामलों’ के लिए बनाए गए हैं। अब अगर कोई केस लिस्ट में शामिल है, तो उसकी सुनवाई तय तारीख पर ही होगी और किसी भी तरह का बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। यानी बार-बार तारीख लेकर केस को लंबा खींचने की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी गई है। कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जो जानबूझकर मामलों को टालते रहे हैं। इससे न्याय प्रक्रिया को तेज करने और लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

 फ्रेश और आफ्टर-नोटिस मामलों में भी कड़े नियम

कोर्ट ने ‘फ्रेश’ और ‘आफ्टर-नोटिस’ मामलों में भी एडजर्नमेंट को लेकर सख्त प्रक्रिया तय की है। अब अगर कोई पक्ष सुनवाई टालना चाहता है, तो उसे पहले से दूसरी पार्टी को इसकी जानकारी देनी होगी और इसका प्रमाण भी देना होगा। यह प्रक्रिया सुनवाई से एक दिन पहले सुबह 11 बजे तक पूरी करनी अनिवार्य है। इसके बाद दूसरी पार्टी को दोपहर 12 बजे तक अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार मिलेगा। साथ ही, एडजर्नमेंट मांगने वाले को ठोस वजह बतानी होगी और यह भी बताना होगा कि पहले कितनी बार तारीख ली जा चुकी है।

 सिर्फ विशेष हालात में ही मिलेगी अगली तारीख

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सुनवाई टाली जा सकेगी। जैसे परिवार में किसी की मृत्यु, गंभीर बीमारी या कोई अन्य ठोस कारण, जिसे कोर्ट उचित माने। इसके अलावा बार-बार तारीख लेने पर भी रोक लगा दी गई है—फ्रेश मामलों में सिर्फ एक बार ही एडजर्नमेंट की अनुमति होगी और लगातार दो बार सुनवाई टालने की छूट नहीं मिलेगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि एडजर्नमेंट की अर्जी तय फॉर्मेट में ही दी जाए। कुल मिलाकर, यह कदम न्याय व्यवस्था को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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