अंतरिक्ष की दुनिया में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO को अपने महत्वाकांक्षी मून बेस प्रोग्राम से जुड़ने का न्योता दिया है। इसकी जानकारी भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दी है। इस प्रस्ताव को भारत-अमेरिका के बीच बढ़ती अंतरिक्ष साझेदारी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
भारत-अमेरिका की स्पेस पार्टनरशिप होगी और मजबूत
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच डीप स्पेस पार्टनरशिप को इससे और मजबूती मिलेगी। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब बेंगलुरु में अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और NASA की ओर से 9वें स्पेस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की सह-अध्यक्षता की गई। इस बैठक में दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग और आपसी भरोसे को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। ऐसे में NASA का ISRO को मून बेस प्रोग्राम से जोड़ने का प्रस्ताव भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी दूतावास ने शेयर किया खास वीडियो
भारत स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मून बेस प्रोग्राम की जानकारी साझा की है। पोस्ट में बताया गया कि मानवता अंतरिक्ष में अपने अगले बड़े कदम की तैयारी कर रही है। NASA चांद पर ऐसा ठिकाना विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जहां भविष्य में अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर काम और वैज्ञानिक अध्ययन कर सकें। दूतावास ने इस कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है। साथ ही संकेत दिया गया कि आने वाले समय में इस मिशन को लेकर एक बड़ी घोषणा की जा सकती है। इससे कार्यक्रम को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है।
क्या है NASA का मून बेस प्रोग्राम?
मून बेस प्रोग्राम का मकसद चांद पर इंसानों के लिए एक स्थायी आधार तैयार करना है। यहां अंतरिक्ष यात्री रह सकेंगे, वैज्ञानिक प्रयोग कर सकेंगे और चंद्रमा की सतह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटा सकेंगे। प्रस्तावित बेस को चांद के साउथ पोल के आसपास विकसित करने पर जोर है। यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पानी की बर्फ मिलने की संभावना है। भविष्य के मिशनों के लिए पानी बेहद उपयोगी संसाधन साबित हो सकता है। चांद पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी स्थापित करने के साथ-साथ इस परियोजना से हासिल तकनीक और अनुभव का इस्तेमाल भविष्य में मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी में भी किया जा सकता है। ऐसे में NASA का ISRO को इस कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भारत के अंतरिक्ष अभियान के लिए एक अहम अवसर बन सकता है।








