आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने SIR को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चुनाव आयोग के हालिया स्पष्टीकरण का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से जारी सफाई के बाद इस मामले को लेकर बनी गलतफहमियां दूर होनी चाहिए। नायडू ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि SIR से जुड़े फैसले तय नियमों के अनुसार आयोग के सभी सदस्यों की सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बनाए रखना राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है।
‘जीत और हार दोनों को सम्मान से स्वीकार करें’
नायडू ने अपने बयान में चुनावी नतीजों को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और नेताओं को जीत के साथ-साथ हार को भी सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए। उनके मुताबिक राजनीतिक फायदे के लिए चुनावी प्रक्रिया या लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर लोगों के भरोसे पर असर नहीं पड़ना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके भीतर कथित मतभेदों को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। आयोग ने 26 सितंबर को जारी अपने स्पष्टीकरण में कहा कि SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को पूर्ण आयोग ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।
SIR नोटिस पाने वालों को मिलेगी बड़ी राहत
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया में नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए भी कुछ बदलाव किए हैं। जिन लोगों को रिकॉर्ड में ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर नोटिस मिला है, उन्हें सामान्य तौर पर ERO या AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINET पर अपलोड करेंगे। इसके बाद संबंधित ERO दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेगा। केवल विशेष परिस्थितियों में सुनवाई की जरूरत होगी और आयोग ने इसे संभव होने पर ऑनलाइन कराने की बात कही है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने की कार्रवाई की मांग
SIR को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने हालिया बयान में कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के दौरान Form-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई है, जबकि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया। इस पूरे विवाद के बीच अब SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची और आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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