जिस हक के लिए 26 साल भटकी शहीद की पत्नी, सुप्रीम कोर्ट ने अब दिलाई बड़ी राहत

शहीद GREF कर्मचारी मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को आखिरकार 26 साल लंबे संघर्ष के बाद बड़ी राहत मिली है। भारत-चीन सीमा के पास सड़क निर्माण के दौरान साथी कर्मचारियों की जान बचाते हुए मोहन सिंह की मौत हो गई थी। उनके साहस और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। इसके बावजूद उनकी पत्नी को विशेष पारिवारिक पेंशन के लिए लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़े।

सुप्रीम कोर्ट ने दिलाई विशेष पारिवारिक पेंशन की राहत

कुलदीप कौर ने विशेष पारिवारिक पेंशन की मांग कई साल पहले उठाई थी, लेकिन उनका दावा खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने माना कि मोहन सिंह की मौत पेंशन नियमों की संबंधित कैटेगरी में आती है और परिवार विशेष पेंशन का हकदार है। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने भी इस निष्कर्ष को बरकरार रखा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने राहत को केवल तीन साल तक सीमित रखने के फैसले में बदलाव किया।

कोर्ट बोला- शहीद के परिवार को हक के लिए नहीं भटकना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोहन सिंह ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान देकर दूसरों की जिंदगी बचाई थी। सरकार ने भी उनके बलिदान को शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया। ऐसे परिवार को अपने जायज अधिकार के लिए लंबे समय तक अदालतों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। कोर्ट ने मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया और पेंशन का लाभ शहीद की मौत की तारीख से देने का निर्देश दिया।

चार हफ्ते में मिलेंगे 10 लाख रुपये

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त 2026 के आदेश में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर कुलदीप कौर को 10 लाख रुपये की समेकित राशि जारी करे। कोर्ट ने यह राहत 13 जुलाई 2000 से 12 जुलाई 2015 की अवधि के लिए दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि कुलदीप कौर को पहले ही कुछ पेंशन और बकाया राशि जारी की जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सरकार की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की। इस फैसले से करीब ढाई दशक से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रही शहीद की पत्नी को बड़ी राहत मिली है।

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