शेयर बाजार में ऐसा क्या हुआ कि कुछ घंटों में डूब गए लाखों निवेशकों के सपने? जानिए गिरावट की पूरी कहानी

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। सुबह बाजार खुलने के बाद ही बिकवाली का दबाव बढ़ने लगा और देखते ही देखते बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंक टूट गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर दिखाई दिया। खासकर आईटी, टेक्नोलॉजी और बड़े निवेश वाली कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस अचानक आई कमजोरी ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को झटका दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू कारणों के साथ-साथ वैश्विक संकेतों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके कारण पूरे दिन दबाव बना रहा।

 विदेशी बाजारों की कमजोरी का भारत पर पड़ा असर

शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक बाजारों में आई कमजोरी को माना जा रहा है। अमेरिका के टेक सेक्टर में बिकवाली बढ़ने के बाद एशियाई बाजारों पर भी दबाव देखने को मिला। विशेष रूप से दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। वहां की कई बड़ी टेक और चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे पूरे एशियाई बाजार का माहौल कमजोर हो गया। विदेशी निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसके बाद कई बाजारों में बिकवाली तेज हो गई। वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों के ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर बढ़ी चिंता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करती दिखाई दी। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा और निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए शेयरों की बिक्री शुरू कर दी।

आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में, दिग्गज शेयरों में बिकवाली

भारतीय बाजार में आईटी सेक्टर इस गिरावट का सबसे बड़ा शिकार बना। देश की कई बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने टेक शेयरों में जमकर मुनाफावसूली की, जिससे आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर सेक्टरों में शामिल हो गया। इसके अलावा बैंकिंग, ऑटो और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कुछ शेयरों में भी दबाव दिखाई दिया। बाजार में कमजोरी बढ़ने के साथ निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने तक टेक और आईटी सेक्टर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय बाजार की दिशा पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

 निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी

बाजार में आई तेज गिरावट का असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। कुछ ही घंटों के कारोबार में निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण घटने से कई निवेशकों के पोर्टफोलियो लाल निशान में पहुंच गए। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट वैश्विक संकेतों और मुनाफावसूली का परिणाम हो सकती है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए। आने वाले दिनों में विदेशी बाजारों की चाल, वैश्विक आर्थिक संकेतक और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि बाजार जल्द संभलता है या गिरावट का यह दौर कुछ और समय तक जारी रहता है।

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