हनुमान मंदिर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन मंडप की छत गिरी, 7 श्रद्धालुओं की मौत

महाराष्ट्र के महाराष्ट्र के परभणी जिले के मानवत तालुका स्थित यशवाड़ी देवस्थान में शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के गर्भगृह के सामने बन रहे सभा मंडप की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छत गिरने के बाद चारों ओर धूल का गुबार फैल गया और लोगों की चीख-पुकार से पूरा परिसर दहल उठा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हादसे में 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, जबकि 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी आधिकारिक रूप से हताहतों के अंतिम आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।

मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए जारी है अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। कई एंबुलेंसों को तत्काल मंदिर परिसर में तैनात किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया। राहत एवं बचाव टीमों ने जेसीबी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में अभी भी कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है, इसलिए बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। स्थानीय लोग भी प्रशासन की मदद में जुटे हुए हैं। शनिवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक थी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।

घायलों का अस्पताल में इलाज

हादसे में घायल हुए श्रद्धालुओं को परभणी जिला सामान्य अस्पताल और आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिला प्रशासन ने सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा है और अतिरिक्त चिकित्सा टीमों को भी तैनात किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माणाधीन सभा मंडप की छत गिरने के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रारंभिक स्तर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

श्रद्धालुओं में दहशत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

यशवाड़ी देवस्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है और यहां हर शनिवार बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में निर्माणाधीन हिस्से के आसपास सुरक्षा प्रबंध पर्याप्त थे या नहीं, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रखा गया था। इस घटना के बाद मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और परिजनों की नजरें बचाव दलों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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