इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शादी के झूठे वादे से जुड़े एक रेप केस में सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि हर प्रेम संबंध का अंत शादी में हो, यह जरूरी नहीं है और न ही हर टूटे रिश्ते को अपराध की नजर से देखा जा सकता है। यह मामला प्रयागराज के कर्नलगंज थाना क्षेत्र से जुड़ा था, जहां साल 2019 में आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
‘रिश्ता टूटना अपराध नहीं’—कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि दो बालिग लोगों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने हों, तो बाद में रिश्ता खत्म हो जाने को रेप का मामला नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि जीवन में रिश्तों में उतार-चढ़ाव, मतभेद और प्राथमिकताओं का बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षित और वयस्क व्यक्तियों को यह समझना चाहिए कि यदि कोई रिश्ता सफल नहीं होता है, तो उसे आपराधिक केस में बदलना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान जरूरी है।
पांच साल पुराना रिश्ता और बाद में दर्ज हुई FIR
मामले की जानकारी के अनुसार, पीड़िता वर्ष 2014 में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रयागराज आई थी, जहां उसकी पहचान आरोपी से हुई। दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और धीरे-धीरे रिश्ता बन गया, जो लगभग पांच साल तक चला। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से मुकर गया। हालांकि जांच और कोर्ट में यह भी सामने आया कि दोनों के बीच संबंध लंबे समय तक सहमति से चलते रहे और बाद में शिकायत दर्ज की गई। खास बात यह है कि केस दर्ज होने के बाद दोनों ने शादी भी कर ली थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर केस रद्द
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें यह स्पष्ट किया गया है कि शादी के वादे पर रेप का केस तभी बनता है जब यह साबित हो कि शुरुआत से ही धोखा देने की नीयत थी। अदालत ने कहा कि इस मामले में ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही धोखे की योजना बनाई थी। कोर्ट ने इसे ‘दुर्लभ मामलों’ की श्रेणी में रखते हुए कहा कि केवल रिश्ते के टूटने को रेप का आधार बनाना कानून का दुरुपयोग होगा। इसलिए ट्रायल कोर्ट में चल रही पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।







