राजस्थान के अजमेर में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा से पहले ही माहौल गरम और उत्साह से भरा दिखाई दिया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रोज़ा रखे होने के बावजूद सभा स्थल की ओर जाते दिखे। कई लोग टोपी पहनकर और हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे। रास्ते में “ना दूरी है ना खाई है, मोदी हमारा भाई है” जैसे नारे सुनाई दिए, जिनसे सभा का माहौल अलग ही रंग में नजर आया। कार्यक्रम स्थल के बाहर और अंदर समर्थकों की भीड़ सुबह से जुटनी शुरू हो गई थी। आयोजकों का कहना है कि अलग-अलग इलाकों से लोग बसों और निजी वाहनों से पहुंचे। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री के कामकाज को सुनने और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आए हैं। वहीं, कई बुर्कानशी महिलाएं भी समूह में पहुंचीं, जो इस रैली की खास तस्वीर बनकर सामने आईं।
उत्साह और उम्मीद: बिना भेदभाव के काम का दावा
सभा में पहुंचे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को करीब से समझना चाहते हैं। कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें लगता है कि सरकार योजनाएं बिना भेदभाव के लागू कर रही है, इसलिए वे अपनी बात रखने और प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने आए हैं। मंच के आसपास लगाए गए पोस्टरों में विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दों से जुड़े संदेश दिखाई दिए। समर्थकों का कहना था कि अजमेर और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सड़क और पर्यटन से जुड़े कामों पर चर्चा की उम्मीद है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की भागीदारी स्थानीय सियासत में नई चर्चा को जन्म देती है, क्योंकि चुनावी माहौल में सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका होती है। हालांकि, विपक्षी दलों का कहना है कि जनसभा में लोगों की मौजूदगी को व्यापक समर्थन का संकेत मानना जल्दबाजी होगी और असली तस्वीर चुनावी नतीजों में ही साफ होगी।
संभावित विरोध और नजरबंदी: सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
जनसभा से पहले कुछ संगठनों ने विरोध का ऐलान किया था, जिसके चलते प्रशासन सतर्क नजर आया। जयपुर समेत प्रदेश के कुछ हिस्सों में करणी सेना और यूथ कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं को एहतियातन नजरबंद किए जाने की खबरें सामने आईं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया। कुछ लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में भी लिया गया ताकि कार्यक्रम के दौरान कोई हंगामा न हो। विरोध करने वाले संगठनों ने अपने-अपने मुद्दे गिनाए, जिनमें शिक्षा से जुड़े नियम, जनहित के सवाल और किसानों की समस्याएं शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से नहीं रोका गया है, लेकिन किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बीच, सोशल मीडिया पर रैली से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो तेजी से साझा किए गए, जिनमें समर्थक और विरोध की तैयारियां दोनों दिखाई दीं।
कड़ी जांच और दोहरी सुरक्षा: हर बैनर-पोस्टर की पड़ताल
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। सभा स्थल पर प्रवेश से पहले लोगों की दो बार जांच की गई। बैनर और पोस्टर तक की जांच की गई ताकि किसी तरह का आपत्तिजनक संदेश या सामग्री अंदर न जा सके। सुरक्षा कर्मियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि कोई व्यक्ति काले कपड़े या विरोध के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल होने वाली चीजें लेकर न पहुंचे। आयोजन स्थल के आसपास पुलिस बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई थी। प्रशासन का कहना है कि यह सब एहतियातन कदम हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। भीड़ प्रबंधन के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए थे। कुल मिलाकर, अजमेर की यह जनसभा उत्साह, राजनीतिक संदेश और कड़ी सुरक्षा—तीनों वजहों से चर्चा में रही। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस रैली के राजनीतिक मायने क्या निकलते हैं और आने वाले दिनों में इसका क्या असर दिखाई देता है।
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