देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के परिवार से एक दुखद खबर सामने आई है। उनकी पत्नी चेन्नम्मा का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्हें कुछ दिनों से सांस लेने में परेशानी हो रही थी, जिसके बाद बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 जुलाई से वह अस्पताल के आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में थीं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनका इलाज कर रही थी, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो पाया। शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और कई प्रमुख नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचने लगे।
देवेगौड़ा के संघर्षपूर्ण सफर में बनीं सबसे बड़ी ताकत
चेन्नम्मा का विवाह वर्ष 1954 में एचडी देवेगौड़ा के साथ हुआ था। उस समय देवेगौड़ा अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर रहे थे। परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने में चेन्नम्मा ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने घर और बच्चों की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई, जिससे देवेगौड़ा राजनीति पर पूरा ध्यान दे सके। इस दंपति के चार बेटे और दो बेटियां हैं। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि चेन्नम्मा हमेशा सादगीपूर्ण जीवन जीती थीं और परिवार को एकजुट रखने में उनकी बड़ी भूमिका रही। राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार होने के बावजूद उन्होंने हमेशा खुद को सार्वजनिक जीवन से दूर रखा और परिवार को प्राथमिकता दी।
एक ऐसी घटना जिसने पूरे देश को चौंका दिया था
चेन्नम्मा का जीवन कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा। वर्ष 2001 में उन पर एक तेजाब हमला भी हुआ था, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी। उस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, लेकिन लंबे इलाज के बाद उन्होंने स्वास्थ्य लाभ किया। इस कठिन दौर में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहीं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि चुनौतियों से लड़ने की उनकी क्षमता ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी। यही वजह रही कि वह देवेगौड़ा परिवार की मजबूत आधारशिला मानी जाती थीं। उनके जीवन का यह संघर्ष आज भी कई लोगों के लिए प्रेरणा का विषय माना जाता है।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
चेन्नम्मा के निधन के बाद अस्पताल और परिवार के निवास स्थान पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक, रिश्तेदार और विभिन्न क्षेत्रों के लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी। राजनीतिक गलियारों में भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया जा रहा है। कई नेताओं ने उन्हें एक समर्पित पत्नी, जिम्मेदार मां और मजबूत व्यक्तित्व वाली महिला बताया। चेन्नम्मा का जाना केवल देवेगौड़ा परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है जो उन्हें करीब से जानते थे। उनके निधन के साथ एक ऐसे अध्याय का अंत हो गया, जिसने दशकों तक एक बड़े राजनीतिक परिवार को मजबूती और संतुलन प्रदान किया।
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