राम मंदिर चढ़ावा मामले में बढ़ी हलचल! अब चंपत राय और अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR की मांग, अयोध्या में नया मोड़

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी का मामला अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। फैजाबाद बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों ने श्रीराम जन्मभूमि थाना पहुंचकर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद रुपये और कीमती आभूषणों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर ली है और मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

शिकायत में लगाए गए कई गंभीर आरोप

बार एसोसिएशन की ओर से दी गई शिकायत में दावा किया गया है कि दान की गिनती के दौरान कुछ लोगों को विशेष रूप से लगाया गया और लंबे समय तक चढ़ावे में कथित गड़बड़ी होती रही। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान कुछ लोगों से नकदी और अन्य सामान भी बरामद हुआ, लेकिन इस पूरे मामले में ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए गए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मामले की पूरी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।

एसआईटी जांच और पहले से दर्ज एफआईआर पर भी उठे सवाल

इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले दर्ज की गई एफआईआर में सभी संभावित आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए गए। उनका कहना है कि जांच से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को भी रिकॉर्ड में जगह नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने नई शिकायत देकर पूरे मामले की दोबारा गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। वहीं, पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब तक 8 गिरफ्तार, रिपोर्ट का इंतजार

राम मंदिर चढ़ावा मामले में अब तक आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है। इस बीच ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया था। हालांकि, अब तक दर्ज एफआईआर में उनके नाम शामिल नहीं हैं। एसआईटी को इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपनी है। सभी की नजर अब इसी रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इसके बाद ही यह साफ हो सकेगा कि जांच में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और आगे क्या कार्रवाई होगी।

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