बंगाल के नतीजों के बाद बदले समीकरण? बांग्लादेश ने जताई नई उम्मीद, ढाका से आया बड़ा मैसेज

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद जहां देश के भीतर सियासी हलचल तेज है, वहीं पड़ोसी देश Bangladesh ने भी इन नतीजों पर गहरी नजर रखी है। भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद बांग्लादेश की ओर से सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वहां के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने उम्मीद जताई है कि अब दोनों देशों के बीच लंबे समय से अटका हुआ Teesta Water Sharing Agreement फिर से चर्चा में आ सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसे क्षेत्रीय कूटनीति के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है।

तीस्ता समझौते पर फिर से चर्चा की उम्मीद

ढाका में मीडिया से बातचीत के दौरान खलीलुर रहमान ने साफ तौर पर कहा कि वह भारत के नए राजनीतिक हालात पर नजर रख रहे हैं, लेकिन किसी के मन की बात पढ़ना उनका काम नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा बांग्लादेश के लिए बेहद अहम है और इससे वहां के लाखों लोगों की जिंदगी जुड़ी हुई है। उन्होंने 2011 में बनी सहमति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय समझौता लगभग तय हो गया था, लेकिन अंतिम रूप नहीं ले सका। अब बदले हुए हालात में इसे फिर से आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्यों अटका था समझौता, क्या बदल सकता है अब?

दरअसल, तीस्ता जल समझौता लंबे समय से भारत और बांग्लादेश के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। साल 2011 में दोनों देशों के बीच इस पर सहमति बनी थी और तत्कालीन प्रधानमंत्री Manmohan Singh की ढाका यात्रा के दौरान इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी। हालांकि, उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के विरोध के चलते यह समझौता अधर में रह गया। इसके बाद बांग्लादेश ने अपनी ओर से नदी प्रबंधन और बहाली से जुड़े प्रोजेक्ट शुरू किए और अन्य देशों से सहयोग लेने की कोशिश भी की। अब नए राजनीतिक परिदृश्य में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस मुद्दे पर फिर से प्रगति हो सकती है।

ढाका-दिल्ली रिश्तों में नई संभावनाएं

बांग्लादेश के अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। वहां की विदेश राज्य मंत्री ने बंगाल चुनाव को भारत का आंतरिक मामला बताया, लेकिन साथ ही दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद भी जताई गई है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बेहतर होता है, तो तीस्ता विवाद का समाधान निकल सकता है। फिलहाल बांग्लादेश की ओर से संकेत साफ हैं कि वह इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। अब सबकी नजर भारत की नई राजनीतिक स्थिति और आने वाले फैसलों पर टिकी है, जो इस लंबे समय से लंबित समझौते की दिशा तय कर सकते हैं।

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