सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचते ही जंतर-मंतर पर क्या हुआ? मंच पर रो पड़े अभिजीत दीपके, फिर कर दिया बड़ा ऐलान

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन में शनिवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के बाद दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। इसके तुरंत बाद आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने मंच संभाला और खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा कर दी। इस दौरान वह भावुक भी नजर आए। मंच पर मौजूद लोगों के बीच बोलते समय उनकी आंखों से आंसू निकल आए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद समर्थकों में भी भावनात्मक माहौल देखने को मिला।

मंच से किया बड़ा ऐलान

अभिजीत दीपके ने अपने संबोधन में कहा कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि एक बड़े मुद्दे से जुड़ा है और इसे किसी भी कीमत पर रोका नहीं जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि वह आज से भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं और आंदोलन पहले से अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा। दीपके ने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को प्रस्तावित मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा। मंच पर बोलते समय वह काफी भावुक हो गए और कुछ क्षणों के लिए रुक गए। इस दौरान उनके साथ मौजूद सहयोगियों ने उन्हें संभाला और हौसला बढ़ाया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी भावुक कर देने वाला था।

अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं सोनम वांगचुक

दूसरी ओर सोनम वांगचुक फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह कदम उठाया गया। पुलिस के अनुसार हाई कोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, ताकि उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके। अस्पताल प्रशासन ने भी बताया है कि वांगचुक डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी नियमित जांच की जा रही है। पिछले कई दिनों से जारी भूख हड़ताल के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार कमजोर हो रहा था। इसी वजह से उनकी मेडिकल स्थिति को गंभीरता से लिया गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस कार्रवाई पर लगाए आरोप

सोनम वांगचुक को हटाए जाने के बाद अभिजीत दीपके ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल भी उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से की गई। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

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