भारत और ईरान के बीच के ऐतिहासिक और कूटनीतिक रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। मौका था मुस्लिम समुदाय के पवित्र त्योहार ईद अल-अधा (बकरीद) का, जिस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई को बधाई संदेश भेजा था। इस बधाई के जवाब में तेहरान से जो आधिकारिक संदेश आया है, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबका ध्यान खींचा है। ईरानी सुप्रीम लीडर ने न केवल PM मोदी की इस पहल की तारीफ की है, बल्कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की बात कही है।
ऐतिहासिक दोस्ती और आपसी सम्मान पर दिया जोर
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की तरफ से जारी आधिकारिक बयान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई ने पीएम मोदी के प्रति अपना आभार जताया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि भारत के प्रधानमंत्री की ओर से मिली यह बधाई दोनों देशों के गहरे रिश्तों को दिखाती है। खामेनेई ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और ईरान की दोस्ती ऐतिहासिक है। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच का यह दोस्ताना सफर आपसी सम्मान और दोनों पक्षों के साझा हितों के आधार पर आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों के मिले-जुले प्रयासों से यह साझेदारी आने वाले दिनों में और ज्यादा मजबूत होगी।
भारत की तरक्की के लिए मांगी अल्लाह से दुआ
ईरानी सर्वोच्च नेता ने अपने इस खास संदेश में भारत की जनता और यहां की सरकार के प्रति बेहद सकारात्मक रुख दिखाया है। पीएम मोदी को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा, “मुझे ईद अल-अधा के पावन मौके पर आपका बधाई संदेश मिला, जिसके लिए मैं आपकी सराहना करता हूँ और आपको भी इस पर्व की मुबारकबाद देता हूँ।” इसके आगे उन्होंने भारत के लिए एक बड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे अल्लाह से भारत सरकार और वहां की जनता की लगातार तरक्की, समृद्धि और हर क्षेत्र में निरंतर मिलने वाली कामयाबी के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं।
पद संभालने के बाद पहला सीधा संवाद और बना बड़ा सस्पेंस
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई के कार्यभार संभालने के बाद भारत के नाम उनका यह पहला सीधा संदेश है। लेकिन इस कूटनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा सस्पेंस भी बना हुआ है। ईरान के सबसे ताकतवर और सर्वोच्च पद पर बैठने के बावजूद, अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई को अभी तक सार्वजनिक रूप से यानी आम जनता के सामने खुलकर नहीं देखा गया है। ऐसे में पर्दे के पीछे से जारी उनके इस पहले आधिकारिक संदेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है। कूटनीतिक जानकार इसे इस बात का संकेत मान रहे हैं कि ईरान अपनी नई लीडरशिप के तहत भी भारत को एक बेहद महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखता है।
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