अब मायके या ससुराल के पास ही नौकरी! यूपी की महिला शिक्षामित्रों के लिए आया बड़ा फैसला,

उत्तर प्रदेश की महिला शिक्षामित्रों के लिए सरकार ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी खत्म होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि अब विवाहित महिला शिक्षामित्रों को उनके मायके या ससुराल के नजदीक ही स्कूल में तैनाती दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा भी मिलेगी, जिससे वे अपनी सुविधा के अनुसार स्थान बदल सकेंगी। यह निर्णय खासतौर पर उन महिलाओं के लिए राहत भरा है, जिन्हें दूर-दराज के इलाकों में नौकरी करने की वजह से पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का सामना करना पड़ता था।

सीधे बैंक खाते में आएगा मानदेय, पारदर्शिता पर जोर

सरकार ने शिक्षामित्रों की आर्थिक व्यवस्था को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि सभी शिक्षामित्रों के बैंक खाते खुलवाए जाएं, ताकि उनका मानदेय सीधे उनके खाते में पहुंचे। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार की देरी या गड़बड़ी की संभावना कम होगी। इस दौरान सम्मान समारोह में कई शिक्षामित्रों को सम्मानित किया गया और बढ़े हुए मानदेय के चेक भी दिए गए। सरकार का यह प्रयास शिक्षामित्रों के मनोबल को बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पुरानी नीतियों पर उठाए सवाल, सेवाएं बचाने का दावा

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले नियमों के खिलाफ शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक बनाने की कोशिश की गई थी, जिसके चलते न्यायालय ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया था। उस समय बड़ी संख्या में परिवारों पर संकट आ गया था। सरकार ने उस स्थिति में हस्तक्षेप करते हुए यह निर्णय लिया कि शिक्षामित्रों की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी, बल्कि उन्हें नई भूमिका में बनाए रखा जाएगा। यह कदम लाखों परिवारों को राहत देने वाला साबित हुआ।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार का दावा, राजनीतिक संदेश भी दिया

सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार के अपने प्रयासों को भी प्रमुखता से रखा। बताया गया कि स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है और अब ज्यादातर विद्यालयों में टॉयलेट, पेयजल, फर्नीचर और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही ड्रॉपआउट दर में भी भारी कमी आई है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक सोच के साथ काम करना जरूरी है, तभी बेहतर पीढ़ी तैयार होगी। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक संदेश देते हुए कहा कि जो सरकार जनता की अनदेखी करती है, उसका परिणाम खराब होता है, जबकि अच्छी सरकार ही बेहतर नतीजे देती है।

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