दिल्ली HC ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी चाइल्ड केयर लीव (CCL) का अधिकार देने का रास्ता साफ कर दिया है। अब तक यह सुविधा मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों की महिला शिक्षकों को उपलब्ध थी, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की देखभाल के लिए मिलने वाली यह छुट्टी केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकती। कोर्ट ने माना कि महिला शिक्षकों को इस सुविधा से वंचित करना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। इस फैसले से दिल्ली के हजारों निजी स्कूलों में काम कर रही शिक्षिकाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
पुराना फैसला पलटा, नए अधिकार को मिली मान्यता
यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनाया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायाधीश शामिल थे। अदालत ने इस मामले में पहले दिए गए एकल पीठ के आदेश को पलटते हुए कहा कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में काम करने वाली महिला शिक्षकों को भी वही सुविधाएं मिलनी चाहिए जो सरकारी स्कूलों के कर्मचारियों को प्राप्त हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों की परवरिश, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए महिला कर्मचारियों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसलिए निजी संस्थान इस अधिकार से उन्हें वंचित नहीं कर सकते।
नियमों में पहले से मौजूद है समान सुविधा का प्रावधान
अदालत ने अपने फैसले में दिल्ली स्कूल शिक्षा नियमों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि संबंधित नियमों के अनुसार निजी स्कूलों के कर्मचारियों को छुट्टियों और सेवा सुविधाओं के मामले में सरकारी कर्मचारियों के बराबर माना जाना चाहिए। यदि सरकारी स्कूलों की महिला शिक्षकों को चाइल्ड केयर लीव मिलती है तो निजी स्कूलों की शिक्षिकाओं को इससे बाहर रखना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को परिवार और नौकरी के बीच संतुलन बनाने के लिए ऐसे अधिकारों की आवश्यकता है। यह फैसला कार्यस्थल पर लैंगिक समानता को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
क्या है चाइल्ड केयर लीव और किन शर्तों पर मिलेगी?
चाइल्ड केयर लीव के तहत महिला कर्मचारी अपने पहले दो बच्चों की देखभाल, पढ़ाई, परीक्षा या बीमारी के दौरान छुट्टी ले सकती हैं। केंद्रीय सेवा नियमों के अनुसार महिला कर्मचारी अपने पूरे सेवा काल में कुल 730 दिन यानी दो वर्ष तक की चाइल्ड केयर लीव प्राप्त कर सकती हैं। सामान्य तौर पर यह अवकाश एक बार में कम से कम 15 दिनों के लिए लिया जाता है और एक कैलेंडर वर्ष में सीमित बार ही इसका उपयोग किया जा सकता है। हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब निजी स्कूलों की महिला शिक्षकों को भी इस महत्वपूर्ण सुविधा का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे कामकाजी माताओं को अपने बच्चों की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने में मदद मिलेगी।
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