भारत और नेपाल के बीच चाय व्यापार को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारत द्वारा चाय के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किए जाने के बाद नेपाल का चाय उद्योग दबाव में आ गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ी मात्रा में नेपाली चाय भारत-नेपाल सीमा पर अटक गई है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे नेपाल के कई चाय उत्पादकों और फैक्ट्री मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि नेपाल सरकार के आश्वासन के बाद बंद पड़ी कई चाय फैक्ट्रियों ने दोबारा काम शुरू कर दिया है, लेकिन सीमा पर फंसी खेप और जांच प्रक्रिया के कारण कारोबार अब भी सामान्य नहीं हो पाया है।
नए नियम के बाद बढ़ी जांच, बॉर्डर पर रुकी चाय की खेप
भारत की खाद्य सुरक्षा एजेंसी FSSAI ने 23 जून से चाय के आयात के लिए नई जांच व्यवस्था लागू की है। इसके तहत भारत में आने वाली कुछ चाय की खेपों का जोखिम आधारित (Risk-Based) लैब परीक्षण किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के चलते नेपाल से आने वाली चाय की कई खेप जांच पूरी होने तक सीमा पर रोक दी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत के गोदामों में लाखों किलो प्रोसेस्ड चाय पड़ी हुई है, जबकि नेपाल में भी बड़ी मात्रा में तैयार चाय का स्टॉक जमा हो गया है। इससे पूर्वी नेपाल के झापा और इलाम जैसे प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों की फैक्ट्रियों का काम प्रभावित हुआ। कुछ फैक्ट्रियों ने कुछ समय के लिए उत्पादन भी रोक दिया था, जिससे किसानों और मजदूरों की आय पर असर पड़ा।
नेपाल सरकार सक्रिय, फैक्ट्रियां फिर से शुरू हुईं
चाय उद्योग में आई रुकावट के बाद नेपाल सरकार ने निर्यातकों और फैक्ट्री मालिकों के साथ बैठक की। सरकार ने भरोसा दिलाया कि भारत के साथ बातचीत कर व्यापार में आ रही दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की जाएगी। इसके बाद कई बंद फैक्ट्रियों ने दोबारा उत्पादन शुरू कर दिया। हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती लैब जांच में लगने वाला समय है। नेपाल में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशाला नहीं होने के कारण कई मामलों में सैंपल जांच के लिए भारत भेजे जाते हैं। रिपोर्ट आने में 15 से 20 दिन तक का समय लग सकता है। इस दौरान चाय की खेप ट्रकों और गोदामों में रुकी रहती है, जिससे गुणवत्ता और कारोबार दोनों प्रभावित होते हैं। यही वजह है कि बड़ी मात्रा में चाय सीमा पर फंसने की बात सामने आई है।
भारतीय उत्पादकों की शिकायत के बाद सख्ती बढ़ी
भारतीय चाय उद्योग लंबे समय से मांग कर रहा था कि आयातित चाय की गुणवत्ता की सख्ती से जांच की जाए। कुछ उत्पादकों का आरोप है कि नेपाल से आने वाली सस्ती चाय को भारतीय प्रीमियम चाय के साथ मिलाकर बेचा जा रहा था, जिससे भारतीय ब्रांड की पहचान और गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। वहीं कुछ कारोबारी संगठनों ने आयातित चाय में गुणवत्ता और रसायनों से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे। इन्हीं चिंताओं के बीच जांच प्रक्रिया को और सख्त किया गया। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार जारी है, लेकिन नए नियमों के कारण चाय कारोबार में देरी और अतिरिक्त जांच का असर साफ दिखाई दे रहा है। अब उद्योग से जुड़े लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोनों देश बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकालेंगे जिससे व्यापार भी प्रभावित न हो और गुणवत्ता मानकों का भी पूरी तरह पालन हो सके।
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