स्टेज पर खींचा, सिगरेट से जलाया… ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की इस मशहूर एक्ट्रेस के साथ हुई थी हैवानियत!

टीवी इंडस्ट्री के सुनहरे दौर का सबसे लोकप्रिय धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ आज भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाए हुए है। साल 2000 के दशक में एकता कपूर का यह पारिवारिक ड्रामा केवल एक सीरियल नहीं था, बल्कि हर घर की दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुका था। इस शो की सफलता का आलम यह था कि इसके किरदार आम जनता के बीच किसी भगवान की तरह पूजे जाते थे। सड़क पर निकलते ही कलाकारों को घेरने वाली फैंस की यह भारी भीड़ कई बार उनके लिए वरदान नहीं बल्कि एक ऐसा खौफनाक अभिशाप बन जाती थी, जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाते।

दिल दहला देने वाला कोलकाता का वो किस्सा

इस सीरियल में तुलसी की सख्त और संस्कारी सास ‘सविता वीरानी’ का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री अपरा मेहता ने हाल ही में अपने जीवन का एक ऐसा खौफनाक सच बयां किया है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। अपरा मेहता ने एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि जब यह शो अपनी लोकप्रियता के चरम पर था, तब वह अपने एक गुजराती नाटक के सिलसिले में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता गई हुई थीं। नाटक के मंचन के बाद जैसे ही वे सार्वजनिक मंच पर पहुंचीं, उन्हें देखने और छूने के लिए बेकाबू भीड़ इस कदर उमड़ पड़ी कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों के लिए भी स्थिति को संभाल पाना नामुमकिन सा हो गया था।

अंगूठी खींचने की कोशिश और जलती सिगरेट से हमला

भीड़ के इस बेकाबू जूनून का जिक्र करते हुए अपरा मेहता ने बताया कि जब हालात बिगड़ने लगे, तो उन्होंने माहौल को शांत करने के लिए अपने फैंस से प्यार से हाथ मिलाना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच कुछ असामाजिक तत्वों ने स्टारडम की दीवानगी में सारी हदें पार कर दीं। भीड़ में से किसी शख्स ने उनकी उंगली में पहनी हुई असली डायमंड रिंग को जबरन खींचकर निकालने की कोशिश की, जिससे उनकी उंगली में चोट आ गई। धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी के इस खौफनाक माहौल के बीच किसी ने जलती हुई सिगरेट से उन्हें बुरी तरह जला दिया। दो दशक बीत जाने के बाद भी उस भयानक घटना की यादें आज भी इस वरिष्ठ अभिनेत्री को अंदर तक सहमा देती हैं।

सेलिब्रिटी कल्चर और फैंस के बीच की बारीक रेखा

अपरा मेहता के साथ घटी यह खौफनाक घटना आज के समय में भी सेलिब्रिटी कल्चर और आम जनता के बीच की उस महीन रेखा को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिसे प्यार और दीवानगी के नाम पर अक्सर पार कर लिया जाता है। किसी कलाकार के प्रति सम्मान और प्रशंसा का भाव रखना पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन जब यह उत्साह हिंसा या असभ्यता का रूप ले लेता है, तो यह मानवता को शर्मसार कर देता है। दो दशक पुराना यह मामला आज के दौर के उभरते कलाकारों और फैंस दोनों के लिए एक बड़ा सबक है कि अंधाधुंध दीवानगी किसी की निजी सुरक्षा और गरिमा पर भारी नहीं पड़नी चाहिए।

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