गोपालगंज में बड़ा फर्जीवाड़ा: बिना नौकरी के शिक्षिका के खाते में आए 17.49 लाख, खुलासे से उड़े होश!

बिहार के गोपालगंज जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया है। मांझा प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रूपनछाप कर्णपुरा में पदस्थापित होने का दावा करने वाली शिक्षिका खुशबू कुमारी के बैंक खाते में अचानक 17 लाख 49 हजार 507 रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर हो गई। यह पैसा एरियर के रूप में 26 मई को उनके खाते में भेजा गया था। जैसे ही इस भारी-भरकम भुगतान की भनक शिक्षा विभाग को लगी, महकमे में हड़कंप मच गया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस शिक्षिका की नियुक्ति और स्कूल में योगदान को लेकर ही शुरुआती दौर से विवाद चल रहा हो, उसके खाते में इतनी बड़ी रकम एकमुश्त कैसे पहुंच गई। इस अजीबोगरीब वाकये ने विभागीय कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।

दस्तावेजों और पूर्व मुखिया के बयानों से गहराया संदेह

इस पूरे मामले की तह तक जाने पर कई चौंकाने वाली परतें खुलती जा रही हैं। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, शिक्षिका खुशबू कुमारी का नियोजन पंचायत कर्णपुरा के नियोजन प्राधिकार के आदेश संख्या 05 के तहत 4 फरवरी 2016 को हुआ था। रिकॉर्ड में यह भी जिक्र मिलता है कि उन्होंने वर्ष 2019 में प्रधानाध्यापक के तौर पर भी कार्य किया था। हालांकि, जब इस मामले पर पंचायत के तत्कालीन मुखिया अवधेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके कार्यकाल में ऐसी किसी भी शिक्षिका की नियुक्ति नहीं हुई थी। पूर्व मुखिया के इस बयान के बाद इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर बड़ा संदेह गहरा गया है। बिना वैध कागजातों और विवादित पृष्ठभूमि के बावजूद आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी वित्तीय राशि जारी कर दी गई, यह किसी पहेली से कम नहीं है।

नोटिस पर नोटिस, लेकिन गायब रहीं शिक्षिका

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। स्थापना शाखा ने 13 अक्टूबर को विद्यालय के वरीय शिक्षक मनोज कुमार चौधरी से स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने पत्र लिखकर पूछा है कि जब खुशबू कुमारी का योगदान तक स्वीकृत नहीं था, तो उनके ई-शिक्षा कोष फॉर्म पर हस्ताक्षर और एंट्री कराने की अनुमति किसने और कैसे दी। इसे सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता माना गया है। इतना ही नहीं, डीपीओ स्थापना विनय कुमार सुमन ने शिक्षिका खुशबू कुमारी को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। पटना हाईकोर्ट में दायर सीडब्ल्यूजेसी संख्या 263/26 के तहत 12 जनवरी 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में सुनवाई की तारीखें तय की गई थीं। 15 सितंबर, 21 सितंबर और अंतिम तिथि 7 अक्टूबर को बुलावा भेजे जाने के बावजूद शिक्षिका नियोजन से जुड़े मूल दस्तावेज लेकर अपना पक्ष रखने एक बार भी उपस्थित नहीं हुईं।

उच्चस्तरीय जांच और एफआईआर की तैयारी

इस हाई-प्रोफाइल वित्तीय फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग एक्शन मोड में आ चुके हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) अमरेंद्र कुमार पांडेय ने जानकारी दी है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। यह गहराई से खंगाला जा रहा है कि आखिर यह अवैध भुगतान किस आधार पर और किन-किन अधिकारियों या कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है। डीईओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच में जिसकी भी संलिप्तता और गड़बड़ी सामने आएगी, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन सभी लापरवाह लोगों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बहरहाल, शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई गोपालगंज से लेकर पूरे बिहार के शिक्षक गलियारों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है और जल्द ही इस पर बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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