अमेरिकी संसद में रचा गया इतिहास: ट्रंप के ‘जिहादी’ हमले का जवाब देकर कैसे पहले मुस्लिम सीनेटर बने अब्दुल अल सैयद?

अमेरिका की राजनीति में इस वक्त एक ऐसे ऐतिहासिक घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है, जिसने अमेरिकी लोकतांत्रिक इतिहास के पन्नों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अमेरिकी संसद (सीनेट) के इतिहास में पहली बार किसी मुस्लिम नेता ने सीनेटर के रूप में अपनी धमाकेदार दस्तक दी है। मिशिगन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर शानदार जीत हासिल करने वाले अब्दुल अल सैयद ने वह मुकाम हासिल कर दिखाया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक राजनीतिक विश्लेषक असंभव मान रहे थे। इस प्रतिष्ठित और बेहद कड़े मुकाबले वाली सीट पर पूरे अमेरिका की निगाहें टिकी हुई थीं, क्योंकि इस जीत ने अमेरिकी संसद की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी है।

कौन हैं अब्दुल अल सैयद और क्या है उनका भारत से नाता?

पेशे से एक योग्य डॉक्टर और प्रखर राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अब्दुल अल सैयद का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के मिशिगन स्थित मेट्रो डेट्रॉइट में हुआ था। उनके पिता मूल रूप से मिस्र से आकर अमेरिका में बस गए थे। हालांकि उनके परिवार की जड़ें मिस्र से जुड़ी हैं, लेकिन उनका भारत के साथ भी एक खास और गहरा वैचारिक व सांस्कृतिक नाता रहा है। अब्दुल अल सैयद ने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के दौरान कई बार भारत की विविधता, उसकी लोकतांत्रिक संस्कृति और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों का गहराई से अध्ययन किया है। भारत के सामाजिक ताने-बाने और विविधताओं से उनका यह जुड़ाव उन्हें अमेरिकी राजनीति में अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता है।

ट्रंप के तीखे हमलों और ‘जिहादी’ तंज को पछाड़कर दर्ज की ऐतिहासिक जीत

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनका पुराना राजनीतिक टकराव रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल अल सैयद पर बेहद गंभीर और तीखे हमले किए थे, यहां तक कि उन पर सार्वजनिक रूप से ‘जिहादी’ होने का आपत्तिजनक आरोप भी मढ़ा गया था। इसके बावजूद, अब्दुल ने न सिर्फ इन तमाम ध्रुवीकरण करने वाले बयानों का डटकर सामना किया, बल्कि ट्रंप समर्थित रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज उम्मीदवार माइक रोजर्स को करारी शिकस्त भी दी। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ सीनेटर गैरी पीटर्स की जगह ली है, जो अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

अमेरिकी संसद में नए बदलाव की शुरुआत और आगे की राजनीतिक राह

अब्दुल अल सैयद की यह जीत केवल एक चुनाव जीतने भर की कहानी नहीं है, बल्कि यह अमरीका में बहुसांस्कृतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुई है। एक डॉक्टर से लेकर सीनेटर तक का उनका यह सफर संघर्ष, दृढ़ संकल्प और जनसेवा की मिसाल पेश करता है। अब जब वे अमेरिकी संसद के गलियारों में कदम रख चुके हैं, तो उनसे देश के अल्पसंख्यकों, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और आम नागरिकों के अधिकारों के लिए एक मजबूत आवाज बनने की बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। इस ऐतिहासिक जीत ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में नस्लीय और धार्मिक बाधाओं को तोड़कर जनता के मुद्दों पर जीत हासिल करना अब पूरी तरह संभव हो चुका है।

Read more-बाथरूम में गाया गाना, स्टूडियो में नहीं मिली थी एंट्री… ऐसे पलटी थी मशहूर कंपोजर अनु मलिक की किस्मत!

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img