कुंडली का ये कालसर्प दोष बना देगा कंगाल, छा जाएंगे संकट के बादल

दूसरी ओर वासुकि और कालसर्प दोष में राहु तृतीय और केतु नवम स्थान पर होता है। इसे शंखनाद कालसर्प योग भी कहा जाता है यह बहुत ही शुभ माना जाता है।

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Kaal Sarp Yog

Kaal Sarp Yog: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ योग ऐसे होते हैं जो कुंडली में बहुत ही शुभ माने जाते हैं। शंखचूड़ कालसर्प दोष, वासुकि कालसर्प दोष से ठीक उल्टा माना जाता है। राहु नवम भाव में होता अन्य सभी ग्रह इसके बीच में होते हैं दूसरी ओर वासुकि और कालसर्प दोष में राहु तृतीय और केतु नवम स्थान पर होता है। इसे शंखनाद कालसर्प योग भी कहा जाता है यह बहुत ही शुभ माना जाता है।

बहुत ही अशुभ माना जाता है शंखचूड़ दोष

शंखचूड़ दोष बहुत ही अशुभ माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में यह योग होता है उनका पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता। ऐसे लोगों को नौकरी मिला बहुत ही मुश्किल होता है। बिजनेस करने वालों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोगों में ओवरकॉन्फिडेंस अधिक रहता है। पिता से तो कम सुख मिलता है मित्र भी धोखेबाज होते हैं।

प्रभाव से बचने के उपाय

-इस अशुभ दोष से बचने के लिए महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करना चाहिए। सावन के महीने में सोमवार का व्रत रखकर रुद्राभिषेक करना चाहिए।

-विवाह के लिए शिव जी का केसर मिले दूध से अभिषेक करना चाहिए।

-जो लोग इस दोष से पीड़ित है उन्हें किसी भी मां के पहले शनिवार से व्रत आरंभ करें और लगातार 86 शनिवार तक व्रत जारी रखें। व्रत के दिन शनि जी की सिंबॉलिक उपासना के साथ हनुमान जी का पाठ करना चाहिए।

(Disclaimer: यहां पर प्राप्त जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। News India इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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