राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव शुक्रवार को सीवान की अदालत में पेश हुए। उनकी यह पेशी करीब 15 साल पुराने चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में हुई। सीवान के एसीजेएम प्रथम न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें मामले से जुड़े आरोपों की जानकारी दी गई और आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की गई। अदालत में यह कार्रवाई लगभग पांच मिनट तक चली। इस पुराने मामले में लालू यादव की पेशी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा शुरू हो गई है।
चुनाव प्रचार के दौरान क्या हुई थी गलती, जिसके चलते दर्ज हुआ केस?
यह पूरा मामला 8 अक्टूबर 2011 का है। उस समय लालू प्रसाद यादव दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में राजद उम्मीदवार परमेश्वर सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। आरोप है कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद उन्होंने बिना प्रशासनिक अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल किया और निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी भाषण दिया। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी शंकर महतो की शिकायत पर दरौंदा थाने में कांड संख्या 146/11 के तहत लालू यादव और परमेश्वर सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था।
गैर जमानती वारंट से कुर्की तक पहुंची थी कार्रवाई
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में लगातार उपस्थित नहीं होने के कारण लालू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। इसके बाद उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश भी दिया गया। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का हवाला देते हुए उनकी ओर से अनुपस्थिति की वजह बताई गई। इसके बाद अदालत ने कुर्की की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। शुक्रवार को लालू यादव स्वयं अदालत पहुंचे। उनके अधिवक्ता कामेश्वर तिवारी ने न्यायालय में उनका पक्ष रखा। वहीं, इस मामले के दूसरे आरोपी परमेश्वर सिंह का निधन हो चुका है।
एक दिन पहले सीवान पहुंचे थे राजद सुप्रीमो
अदालत में पेश होने से एक दिन पहले यानी गुरुवार शाम को लालू प्रसाद यादव सीवान पहुंचे थे। उनके स्वागत के लिए राजद नेताओं और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी थी। उन्होंने पचरूखी स्थित एक होटल में रात बिताई। इस दौरान विधान परिषद सदस्य विनोद जायसवाल, पूर्व विधायक भोला यादव और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी समेत कई नेता मौजूद रहे। रघुनाथपुर विधायक ओसामा साहब सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भी उनका स्वागत किया। अब इस पुराने मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजर बनी हुई है।
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