बॉलीवुड संगीत जगत के दिग्गज कंपोजर अनु मलिक की सफलता के पीछे एक बेहद दिलचस्प और संघर्ष से भरा इतिहास रहा है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना इंटरव्यू क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपने शुरुआती दिनों के कड़े संघर्ष और उन पलों को याद किया है जब उन्हें इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े थे। आइए जानते हैं कि कैसे एक छोटे से वाकये ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी और उन्हें रातों-रात शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया।
दिग्गजों के दौर में पहचान बनाने की चुनौती
अपने शुरुआती दिनों के बारे में बात करते हुए अनु मलिक ने बताया कि उस दौर में हिंदी फिल्म संगीत पर आर.डी. बर्मन, कल्याणजी-आनंदजी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जैसे दिग्गज संगीतकारों का एकछत्र राज हुआ करता था। उस समय महबूब स्टूडियो, फिल्म सेंटर और फेमस स्टूडियो जैसे गिने-चुने रिकॉर्डिंग स्थान हमेशा बुक रहते थे। लता मंगेशकर, आशा भोसले और किशोर कुमार जैसे महान गायकों की डेट्स मिलना और स्टूडियो के अंदर एंट्री पाना नए कलाकारों के लिए किसी बड़े इम्तिहान से कम नहीं था।
जब बाथरूम में गाना सुनाकर डायरेक्टर को किया इंप्रेस
अनु मलिक ने अपने संघर्ष का सबसे बड़ा किस्सा साझा करते हुए बताया कि स्टूडियो के बाहर घंटों खड़े रहने के बावजूद जब उन्हें अंदर जाने का मौका नहीं मिलता था, तो वह किसी भी हद तक चले जाते थे। एक मशहूर वाकये का जिक्र करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें अपनी एक फिल्म तब मिली थी, जब उन्होंने मौका पाकर एक डायरेक्टर को सीधे बाथरूम में अपना गाना सुना दिया था। उनके मुताबिक, उस समय उन्हें सुनने वाला या उनका साथ देने वाला कोई नहीं था, और वह अपने पिता का दुख देखकर इस तरह के अनूठे रास्ते अपनाने पर मजबूर हो गए थे।
पिता के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उठाया यह कदम
कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद जब अनु मलिक का संगीत लोगों को पसंद आने लगा और प्रोड्यूसर्स खुद उनके पास काम लेकर आने लगे, तो उनकी किस्मत का सितारा चमक उठा। उन्होंने बताया कि सफलता मिलने के बाद उन्होंने एक ऐसा पल देखा जिसने उन्हें सबसे ज्यादा संतुष्टि दी। उन्होंने अपने पिता सरदार मलिक को एक बार बस स्टॉप पर खड़े हुए देखा था, जिसके बाद उन्होंने तुरंत अपने पिता को एक कार गिफ्ट की और कहा कि आज से यह गाड़ी और ड्राइवर दोनों आपके हैं।








