बिहार की राजनीति में निर्दलीय एमएलसी राहुल राज की बीजेपी में वापसी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपनी सहयोगी पार्टी बीजेपी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने राहुल राज को पहले पार्टी से बाहर करने और फिर चुनाव जीतने के कुछ ही दिनों बाद दोबारा शामिल करने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से इस पूरे मामले पर विचार करने की मांग की है। बिहार में हाल ही में विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव हुए थे। इनमें दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए थे। अब उनकी बीजेपी में वापसी के बाद एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।
पहले पार्टी से निकाला, फिर बीजेपी में वापसी कैसे हुई?
पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उमेश कुशवाहा ने कहा कि बीजेपी किसे पार्टी में शामिल करती है और किसे बाहर रखती है, यह उसका आंतरिक मामला है। लेकिन उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति को हाल के दिनों में अनुशासनहीनता के आधार पर पार्टी से निष्कासित किया गया था, उसे करीब 15 दिनों के भीतर दोबारा शामिल कैसे कर लिया गया? जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को इस घटनाक्रम पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके मुताबिक, एनडीए की पहचान उसके घटक दलों के बीच एकता और आपसी तालमेल से है। ऐसे मामलों पर गठबंधन के सभी दलों को नजर रखनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी को पार्टी में शामिल करना बीजेपी का अपना फैसला है। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से निष्कासन और वापसी के बीच कम समय के अंतर को लेकर है।
दो निर्दलीय एमएलसी की जीत के बाद बदला राजनीतिक समीकरण
बिहार विधान परिषद की हालिया आठ सीटों के चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने राजनीतिक समीकरणों को चर्चा में ला दिया है। इनमें सारण शिक्षक सीट से राहुल राज की जीत प्रमुख रही। चुनाव के बाद राहुल राज ने बीजेपी का दामन थाम लिया। वहीं, दूसरे निर्दलीय विजेता ने भी बीजेपी को समर्थन दिया है। राहुल राज की वापसी को लेकर जेडीयू की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच तालमेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उमेश कुशवाहा के बयान से साफ है कि जेडीयू इस घटनाक्रम को केवल बीजेपी का आंतरिक मामला मानकर छोड़ने के पक्ष में नहीं दिख रही है। हालांकि, उन्होंने गठबंधन में किसी तरह के टकराव की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
वाराणसी में JDU की बैठक और यूपी चुनाव की तैयारी पर भी बोले
बातचीत के दौरान उमेश कुशवाहा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और वाराणसी में हुई जेडीयू की बैठक पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बैठक को सफल बताते हुए कहा कि पार्टी दूसरे राज्यों में भी संगठन को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। उनके मुताबिक, निशांत कुमार और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य अपने संगठन का विस्तार करने के साथ-साथ एनडीए को भी मजबूती देना है। इस बयान के जरिए उन्होंने उत्तर प्रदेश में पार्टी की सक्रियता का संकेत दिया।
इंडिया गठबंधन की रैली पर क्या बोले उमेश कुशवाहा?
इंडिया गठबंधन की रैली से जुड़े सवाल पर जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस पर अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाया गया है तो उसकी पहचान सामने लाई जानी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों का हवाला देते हुए भी इसी बात पर जोर दिया। फिलहाल बिहार की राजनीति में राहुल राज की बीजेपी में वापसी और जेडीयू की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना होगा कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इस सवाल पर कोई जवाब देता है या नहीं।
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