Ujjain Hotel Accident: मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। देवास रोड स्थित श्रीगंगा होटल में देर रात चार लोगों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि होटल के पिछले हिस्से में बने फूड वेस्ट टैंक में कुछ लोग काम करने के लिए उतरे थे, लेकिन कोई भी जिंदा बाहर नहीं लौट सका। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टैंक के अंदर जहरीली गैस होने की आशंका है, जिसकी चपेट में आने से चारों लोग बेहोश हो गए। घटना के बाद होटल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और सभी को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
एक व्यक्ति टैंक में उतरा, फिर बचाने पहुंचे तीन लोग
जानकारी के अनुसार, श्रीगंगा होटल के पिछले हिस्से में खाने के बचे हुए कचरे को इकट्ठा करने और निस्तारण के लिए एक विशेष चैंबर बनाया गया था। देर रात एक आउटसोर्स कर्मचारी किसी काम से उसके अंदर उतरा, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं आया। उसे मुसीबत में देखकर तीन अन्य लोग उसे बचाने के लिए चैंबर में उतर गए। आशंका है कि अंदर मौजूद जहरीली गैस के कारण चारों बेहोश हो गए। इस हादसे में वाहिद, मनोज, कमलेश और नितिन की जान चली गई।
गैस रिसाव की आशंका, पुलिस ने बताई हादसे की वजह
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा के मुताबिक, चैंबर में होटल के कर्मचारियों के साथ बाहर से बुलाए गए लोग भी मौजूद थे। शुरुआती जांच में गैस रिसाव की आशंका सामने आई है। बताया गया कि चैंबर का फर्श भी फिसलन भरा था, जिससे अंदर मौजूद लोगों के गिरने और बेहोश होने की आशंका है। हालांकि, गैस किस प्रकार की थी और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
जिला कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार, पहले दो लोग टैंक में उतरे थे और उन्हें बचाने के प्रयास में दो अन्य लोग भी अंदर चले गए। पुलिस और प्रशासन की टीमें हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि होटल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
10 साल से चल रहा था होटल, हादसे के बाद उठे सुरक्षा पर सवाल
जानकारी के मुताबिक, श्रीगंगा होटल पिछले करीब 10 वर्षों से संचालित हो रहा है। वहीं इससे जुड़ी फर्म उज्जैन में लगभग 50 साल से कारोबार कर रही है। इस घटना ने बंद टैंकों और कचरा निस्तारण वाले चैंबर में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। अब यह पता लगाना अहम होगा कि चैंबर में जहरीली गैस कैसे बनी और वहां काम करने वाले लोगों के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे।








