उत्तर प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर के तबादले की खबर चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें मुजफ्फरनगर परिवार न्यायालय में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह त्वरित अदालत में गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई कर रहे थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अप्रैल से सितंबर के बीच 11 मामलों में 23 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया था। उनके फैसलों के कारण वह पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। अब नई नियुक्ति के बाद उनके न्यायिक कार्यक्षेत्र में बदलाव हुआ है। हालांकि, तबादले को लेकर किसी आधिकारिक कारण की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे किसी विवाद से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
अदालत से 97 मामले हटाए जाने पर उठाए थे सवाल, क्या था पूरा मामला?
रवि कुमार दिवाकर का तबादला ऐसे समय हुआ है, जब उन्होंने अपनी अदालत से 97 गंभीर आपराधिक मामलों को दूसरी अदालतों में भेजे जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। जानकारी के अनुसार, इन मामलों में हत्या सहित अन्य गंभीर अपराध शामिल थे। बताया गया कि तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीके सिंह के प्रशासनिक आदेशों के जरिए इन मामलों को स्थानांतरित किया गया था। दिवाकर ने अगस्त में इस प्रक्रिया को लेकर कानूनी सवाल उठाए थे। उनका मुख्य मुद्दा यह था कि जिन मामलों में सुनवाई शुरू हो चुकी हो, उन्हें दूसरी अदालत में भेजने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है या नहीं। इस मुद्दे ने न्यायिक कामकाज में प्रशासनिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की भूमिका पर चर्चा शुरू कर दी थी।
NDPS मामले में 35 पन्नों का फैसला, न्यायिक स्वतंत्रता पर भी जताई चिंता
दिवाकर ने करीब दस साल पुराने मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी करते हुए 35 पन्नों का फैसला सुनाया था। इस फैसले में उन्होंने मामलों के स्थानांतरण और न्यायिक स्वतंत्रता से संबंधित सवालों पर विस्तार से चर्चा की थी। उन्होंने यह चिंता भी जताई थी कि प्रशासनिक आदेशों के जरिए न्यायिक कार्यवाही प्रभावित होने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन होना चाहिए। मामला केवल अदालतों के बीच केस बांटने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें न्यायिक अधिकारियों के अधिकारों और प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं पर भी सवाल उठे थे। हालांकि, इन टिप्पणियों और तबादले के बीच सीधे संबंध की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
फैमिली कोर्ट में संभालेंगे नई जिम्मेदारी, त्वरित अदालत में भी बदलाव
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, रवि कुमार दिवाकर अब मुजफ्फरनगर परिवार न्यायालय में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे। वहीं, शिव कुमारी को त्वरित अदालत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का कार्यभार सौंपा गया है। इस बदलाव से दोनों न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों में परिवर्तन हुआ है। दिवाकर के पिछले फैसलों और 97 मामलों के स्थानांतरण पर उठाए गए सवालों के कारण यह तबादला चर्चा में जरूर है, लेकिन इसे किसी दंडात्मक कार्रवाई के रूप में पेश करने के लिए पर्याप्त आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के तहत नई नियुक्तियां की गई हैं और आगे न्यायिक कामकाज इसी व्यवस्था के अनुसार संचालित होगा।








