इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि इस रैली से उनका कोई संबंध नहीं है और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उनकी लड़ाई अलग है। विपक्षी दल इस रैली के जरिए SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, ओवैसी ने बताया कि वह इस मामले को अदालत में उठा रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण पर भी सवाल उठाए।
सपा के मुस्लिम नेताओं पर निशाना, कयादत को लेकर कही बड़ी बात
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर चर्चा करते हुए ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेताओं को लेकर भी टिप्पणी की। उनका कहना है कि सपा के मुस्लिम नेता मुस्लिम समुदाय की स्वतंत्र राजनीतिक कयादत करने के बजाय पार्टी नेतृत्व के साथ चलते हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अपनी राजनीतिक ताकत विकसित करनी चाहिए और दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ओवैसी ने कैराना की सांसद इकरा हसन और विधायक नाहिद हसन का नाम लेते हुए भी टिप्पणी की। उनके इस बयान से यूपी में मुस्लिम नेतृत्व और राजनीतिक भागीदारी को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
जामिया और JNU के मुद्दे पर भी बोले AIMIM प्रमुख
जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े नारों के मुद्दे पर ओवैसी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपति और रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। साथ ही, ओवैसी ने जामिया के छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए उन्हें जायज बताया। उनके बयान में विश्वविद्यालय परिसरों में अभिव्यक्ति, प्रशासनिक जवाबदेही और छात्रों की मांगों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
शरजील इमाम मामले में क्या बोले ओवैसी? अदालत में इंसाफ की बात
शरजील इमाम के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि किसी व्यक्ति की विचारधारा से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उसे न्याय से वंचित किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि किसी भी मामले में फैसला अदालत को करना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ने देना चाहिए। ओवैसी के इन बयानों में SIR, मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व, विश्वविद्यालयों के मुद्दे और न्यायिक प्रक्रिया जैसे अलग-अलग विषय शामिल रहे। इंडिया गठबंधन की रैली से दूरी बनाने के उनके बयान ने भी राजनीतिक चर्चा को जगह दी है। हालांकि, रैली और SIR को लेकर विभिन्न दलों के रुख तथा उनके आगे के कदमों पर नजर बनी हुई है।
Read more-‘कुंभ मेले में दूसरे धर्मों के लोगों का क्या काम?’ नितेश राणे के बयान से उठा नया विवाद








