उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के बीच मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में कहीं मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज होने का दावा सामने आया, तो कहीं पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ लिखा मिला। कुछ अन्य प्रविष्टियों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन मामलों के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। हालांकि, इन गड़बड़ियों को चुनाव में धांधली का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग ने बताई गड़बड़ी की वजह
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, मतदाता सूची में कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में से 158 ऐसी प्रविष्टियां मिलीं, जिनमें नाम या अन्य विवरण असामान्य दिखाई दिए। कार्यालय ने इसकी वजह अंग्रेजी से हिंदी में नाम बदलने वाले सॉफ्टवेयर की संभावित त्रुटि और मानवीय लापरवाही बताई। उदाहरण के तौर पर, ‘Ramhit Yadav’ को गलत तरीके से ‘Ram hit Yadav’ लिखने पर सॉफ्टवेयर उसका अर्थ ‘राम ने यादव को मारा’ कर सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी गलतियों को सुधारने की व्यवस्था थी, लेकिन कुछ प्रविष्टियों में सुधार नहीं हुआ। मामले में संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
साकेत गोखले से संजय सिंह तक ने उठाए सवाल
मतदाता सूची की कथित विसंगतियों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने चुनाव आयोग से सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड सार्वजनिक करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ दर्ज होने पर सवाल उठाया। श्रीनिवास बी.वी. ने भी सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर तंज कसा, जबकि मनोज काका ने एक अन्य कथित प्रविष्टि को लेकर जवाबदेही मांगी। दूसरी ओर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने कहा है कि मतदाता सूची की गलतियों को दूर करना संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या सामने आता है और इन त्रुटियों को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।







