उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई है। नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है, जिससे शहर के निचले इलाकों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रसिद्ध लेटे हनुमान मंदिर में करीब 15 फीट तक पानी भर जाने के कारण बजरंगबली की प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। जलभराव के चलते मंगलवार को भक्त अपनी आस्था के अनुसार हनुमान जी को सिंदूर नहीं अर्पित कर सके, जिसके बाद पुजारियों और श्रद्धालुओं ने 21 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक कर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके अलावा, गोमती के तट पर स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर परिसर भी चारों तरफ से पानी से घिर गया है।
फैजुल्लागंज में दहशत: घरों में घुस रहे जहरीले जीव और बच्चों की पढ़ाई ठप
बाढ़ का पानी अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिहायशी इलाकों में घुसकर लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन गया है। फैजुल्लागंज जैसे इलाकों में हालात बद से बदतर हो गए हैं। गंदे पानी और जलभराव के बीच घरों में सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के घुसने से स्थानीय निवासियों में भारी दहशत का माहौल है। माता-पिता इस बात से इतने सहमे हुए हैं कि पिछले करीब एक हफ्ते से बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं, क्योंकि रास्तों में भरे पानी और आसपास के खतरों के कारण बच्चों की सुरक्षा पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस की गश्त और प्रशासनिक सतर्कता
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ चोरी और आपराधिक गतिविधियों की आशंका को भी बल मिला है। इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने देर रात तक विशेष सतर्कता अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों की टीमों ने पानी से घिरे इलाकों में घर-घर जाकर लोगों का हालचाल जाना और उनकी समस्याओं को सुना। इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने और सूने पड़े घरों में चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए रातभर विशेष गश्त (सीटी अभियान) जारी रखी गई, ताकि जनता को सुरक्षा का अहसास कराया जा सके।
राजनीतिक हलचल और मुआवजे की मांग
लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बाढ़ से उपजे हालात ने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने मांग की है कि राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को तत्काल प्रभाव से तेज किया जाए। इसके साथ ही, किसानों की बर्बाद हुई फसलों का सही आकलन कर उन्हें उचित मुआवजा दिए जाने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है, ताकि संकट के इस दौर में आम जनता को राहत मिल सके।
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