यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर महासंग्राम: इन दिग्गजों की कुर्सी पर मंडराया खतरा, बसपा का उच्च सदन से पत्ता साफ!

यूपी की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घमासान शुरू होने वाला है। राज्य कोटे की 10 राज्यसभा सीटों और 11 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी की जाएगी, जबकि 16 अक्टूबर को मतदान और उसी दिन मतगणना संपन्न होगी। इस चुनाव के बाद संसद के ऊपरी सदन में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, खासकर उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।

25 नवंबर को खत्म हो रहा है इन दिग्गजों का कार्यकाल

यूपी से राज्यसभा की जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उन सभी का कार्यकाल इसी साल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें से 8 सीटें भारतीय जनता पार्टी, 1 सीट समाजवादी पार्टी और 1 सीट बहुजन समाज पार्टी के पास है। बीजेपी कोटे से सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों में बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं। इसके अलावा, डॉ. दिनेश शर्मा के अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट पर भी इसी के साथ उपचुनाव होना है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी इसी अवधि में पूरा हो रहा है।

विधानसभा के मौजूदा गणित से तय होगी जीत, बसपा का राज्यसभा से हो सकता है सफाया

राज्यसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान संख्या बल बेहद अहम रहने वाला है। विधानसभा की कुल 403 सीटों में से कुछ विधायकों के निधन के बाद मौजूदा संख्या 397 है। इस हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी दल को करीब 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखें तो विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के पास एक भी विधायक नहीं है। ऐसे में रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने के बाद उच्च सदन से बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा और पार्टी के पास राज्यसभा में एक भी सीट नहीं बचेगी।

त्योहारों के बीच गर्माएगी सियासत, विधान परिषद की 11 सीटों पर भी होगी टक्कर

अक्टूबर और नवंबर के महीने में त्योहारों की धूम के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राजनीतिक हलचल भी चरम पर होगी। राज्यसभा की 10 सीटों के साथ-साथ विधान परिषद की 11 सीटों पर भी नए चेहरों का चयन होना है। इन दोनों चुनावों के चलते सभी राजनीतिक दलों के भीतर टिकट वितरण, उम्मीदवारों के नाम और आपसी समीकरणों पर मंथन तेज हो गया है। सबसे ज्यादा रोमांचक मुकाबला राज्यसभा की 10वीं सीट को लेकर रहने की उम्मीद है, जहां जीत-हार के लिए दूसरी वरीयता के वोट निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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