एक अमावस्या और 64 देवियों की पूजा, आखिर क्या है इसके पीछे की मान्यता?

Pithori Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भाद्रपद महीने की अमावस्या को कई जगहों पर पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। साल 2026 में यह व्रत 10 सितंबर को रखा जाएगा। यह दिन खासतौर पर माताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। पूजा-पाठ के दौरान माता दुर्गा के साथ 64 योगिनियों की आराधना करने की परंपरा भी बताई गई है।

64 योगिनियों की पूजा के पीछे क्या है मान्यता?

पिठोरी अमावस्या की पूजा में 64 योगिनियों का विशेष स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये योगिनियां देवी शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक हैं। इन्हें शक्ति, सुरक्षा और मातृ ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। एक धार्मिक कथा के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के दिन माता पार्वती ने 64 योगिनियों के साथ भगवान गणेश की पूजा की थी। इसी प्रसंग से इस दिन 64 योगिनियों की पूजा की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। मान्यता है कि माताएं इनकी आराधना करके अपनी संतान को परेशानियों और संकटों से बचाने की प्रार्थना करती हैं।

आटे से बनाई जाती हैं 64 आकृतियां

इस व्रत की पूजा में एक खास परंपरा आटे से प्रतिमाएं या छोटे-छोटे पिंड बनाने की है। महिलाएं गेहूं या चावल के आटे से 64 छोटी आकृतियां तैयार करती हैं और उन्हें 64 योगिनियों का प्रतीक मानकर पूजा करती हैं। आटे से आकृतियां बनाने की इसी परंपरा के कारण इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। पूजा के दौरान माताएं देवी-देवताओं का ध्यान करती हैं और अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने की धार्मिक मान्यता है।

मां दुर्गा से मांगी जाती है संतान की सुरक्षा

64 योगिनियों के साथ माता दुर्गा की पूजा भी इस दिन महत्वपूर्ण मानी जाती है। देवी दुर्गा को शक्ति और रक्षा का स्वरूप माना गया है। इसलिए महिलाएं मां दुर्गा से अपनी संतान को हर तरह के संकट से बचाने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं में पिठोरी अमावस्या का व्रत विशेष रूप से संतान के कल्याण से जुड़ा बताया गया है। माताएं अपने बच्चों की दीर्घायु, आरोग्य और सफलता के लिए यह व्रत रखती हैं। हालांकि, पूजा की विधि और मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ अलग हो सकती हैं।

Disclaimer: यहां पर प्राप्त जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. News India इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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