भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की गुरुवार को हुई अहम समीक्षा बैठक में कई बड़े नाम शामिल हुए, लेकिन चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर की गैरमौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा। खास बात यह रही कि अगरकर बैठक में ऑनलाइन माध्यम से भी नहीं जुड़ सके। बैठक में हेड कोच गौतम गंभीर, टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर, टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के डायरेक्टर वीवीएस लक्ष्मण मौजूद रहे। ऐसे में अगरकर की अनुपस्थिति को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने अब इसकी वजह स्पष्ट करते हुए कहा है कि बैठक बहुत कम समय के नोटिस पर बुलाई गई थी और उस समय अगरकर शहर से बाहर थे।
ऑनलाइन जुड़ने की भी नहीं थी गुंजाइश
देवजीत सैकिया के मुताबिक, अगरकर ऐसी जगह मौजूद थे जहां कोशिश करने के बावजूद ऑनलाइन बैठक में शामिल होना संभव नहीं था। उन्होंने साफ किया कि उनकी गैरमौजूदगी के पीछे कोई विवाद या जानबूझकर बैठक से दूरी बनाने जैसी बात नहीं थी। अगरकर का मौजूदा कार्यकाल सितंबर में खत्म होने वाला है, इसलिए इस बैठक में उनकी मौजूदगी को काफी अहम माना जा रहा था। इसी वजह से उनकी अनुपस्थिति के बाद सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में उनके अगले कार्यकाल को लेकर चर्चा तेज हो गई। हालांकि बोर्ड की तरफ से अभी उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने को लेकर कोई फैसला घोषित नहीं किया गया है।
क्या अगरकर का कार्यकाल बढ़ेगा? BCCI ने दिया जवाब
बैठक से पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि अजीत अगरकर को चीफ सेलेक्टर के पद पर एक साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जा सकता है। माना जा रहा था कि समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर भी बातचीत होगी। लेकिन BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने इस तरह की अटकलों को फिलहाल खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि बैठक के एजेंडे में अगरकर के कार्यकाल को बढ़ाने का विषय शामिल ही नहीं था। यानी अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सितंबर के बाद अगरकर चीफ सेलेक्टर बने रहेंगे या बोर्ड किसी नए नाम पर विचार करेगा।
वीवीएस लक्ष्मण को लेकर भी BCCI ने साफ की तस्वीर
बैठक के बाद BCCI ने वीवीएस लक्ष्मण को ‘डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट’ बनाए जाने की खबरों पर भी स्थिति स्पष्ट की। ऐसी चर्चा थी कि बोर्ड इस पद को तैयार कर सकता है और लक्ष्मण को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि देवजीत सैकिया ने कहा कि बोर्ड ने इस विषय पर कोई विचार नहीं किया है। वहीं, चीफ सेलेक्टर के रूप में अगरकर के कई फैसले पहले भी चर्चा में रहे हैं, जिनमें सीनियर खिलाड़ियों को लेकर चयन नीति और कप्तानी से जुड़े फैसले शामिल हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि उनके कार्यकाल को लेकर BCCI आगे क्या फैसला करता है।
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