नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान को लेकर प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को संसद में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने आपदा के दौरान भारत और चीन से मिली मदद के लिए दोनों देशों का आभार जताया। शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय सहयोग लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि सरकार आपदा के पहले दिन से ही दूसरे देशों के साथ समन्वय बनाकर राहत और बचाव का काम कर रही है।
भारत लगातार भेज रहा राहत सामग्री
26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब भी 4 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं, जबकि 1127 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर मदद का भरोसा दिया था। इसके बाद भारत की ओर से राहत सामग्री भेजी जा रही है। इसमें भोजन, दवाइयां, पुल निर्माण से जुड़ा सामान और डीएनए विशेषज्ञों की टीम शामिल है। संसद में शाह ने भारत और चीन दोनों के सहयोग को लेकर धन्यवाद दिया।
1.1 मिलियन SMS भेजने का दावा, सूचना न देने के आरोप को नकारा
आपदा के दौरान लोगों को समय पर जानकारी नहीं देने के सवाल पर भी प्रधानमंत्री शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से करीब 11 लाख नागरिकों को SMS भेजकर जरूरी जानकारी दी गई थी। शाह ने दावा किया कि बाढ़ जैसी स्थिति का अनुमान पहले से लगाना बेहद मुश्किल था। उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार को खतरे की जानकारी मिली, लोगों तक संदेश पहुंचाने का काम किया गया। राज्य और स्थानीय स्तर पर समन्वय की कमी के आरोपों को भी उन्होंने खारिज किया।
टनल में फंसे लोगों के रेस्क्यू पर भी दिया जवाब
संसद में हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में फंसे लोगों के बचाव अभियान को लेकर भी सवाल उठे। बालेन शाह ने कहा कि सभी संबंधित पक्ष शुरुआत से रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि यह सामान्य बचाव अभियान नहीं है और इसमें विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत पड़ रही है। सरकार उपलब्ध संसाधनों के आधार पर लगातार लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है।
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