झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। हाल ही में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार पूरी तरह से तानाशाही के रास्ते पर चल रही है और उसका यह अड़ियल रवैया लोकतंत्र में स्वीकार्य नहीं है। सपा सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा है कि छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई के लिए सरकार को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने संसद में विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर भी सरकार को घेरने का प्रयास किया।
जंतर-मंतर की घटना और संसद में गूंजे अन्य गंभीर मुद्दे
अवधेश प्रसाद ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि विपक्षी दल पूरी तरह से संसदीय परंपराओं और मान्यताओं का पालन कर रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दों का जिक्र करते हुए तीखे सवाल उठाए कि आखिर वहां छात्रों पर किस प्रकार की कार्रवाई की गई और इसके पीछे किसका निर्देश या आदेश था। इसके अलावा उन्होंने देश के अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाते हुए कहा कि इस पर देश की जनता जवाब चाहती है, लेकिन सरकार इन विषयों पर अपनी बात रखने से बचती नजर आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवादहीनता के कारण ही इस प्रकार के हालात पैदा हो रहे हैं।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया और बातचीत के जरिए समाधान की पहल
इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में टकराव की बजाय बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र और सही रास्ता है। पार्टी प्रमुख का मानना है कि इस प्रक्रिया को लगातार जारी रहना चाहिए, क्योंकि मुख्यमंत्री और संबंधित प्रशासन की ओर से भी छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने की बात कही गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते दोनों पक्षों के बीच सार्थक संवाद नहीं हुआ, तो यह विरोध प्रदर्शन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, जिससे राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बीजेपी का झारखंड बंद और राज्य के कई जिलों में दिखा असर
छात्रों पर हुई कार्रवाई के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए झारखंड बंद का आह्वान किया है। इस बंद का असर राजधानी रांची समेत हजारीबाग, पलामू, गिरिडीह और चतरा जैसे प्रमुख जिलों में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। विपक्षी दल के कार्यकर्ता सुबह से ही सड़कों पर उतर आए हैं और कई स्थानों पर यातायात को बाधित कर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।








