सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ की गूंज सुनाई देने लगती है। भगवान शिव को समर्पित इस पावन मास में शिव भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सावन सोमवार का व्रत रखते हैं ताकि भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त कर सकें। पुराणों के अनुसार, सावन के महीने में माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हालांकि, यह व्रत जितना फलदायी माना जाता है, इसके नियम उतने ही कड़े और अनुशासन से भरे होते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में व्रत के दौरान ऐसी गलतियां हो जाती हैं, जिससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। इसलिए जरूरी है कि व्रत रखने वाले हर भक्त को इसके नियमों, खान-पान और पूजा-पाठ की सही विधि की पूरी जानकारी हो।
सावन सोमवार व्रत में क्या खाएं और किन चीजों से बनाएं दूरी?
सावन सोमवार के व्रत में खान-पान को लेकर बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस पूरे व्रत के दौरान केवल सात्विक और फलाहारी भोजन का ही सेवन करना चाहिए। व्रत के दौरान आप मौसमी फल जैसे सेब, केला, अनार, पपीता, अंगूर, आम, अनानास और जामुन का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा दूध, दही, पनीर और दूध से बनी सात्विक मिठाइयां भी खाई जा सकती हैं। ऊर्जा बनाए रखने के लिए बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट, मखाना और मूंगफली जैसे मेवे बहुत अच्छे माने जाते हैं। फलाहार के रूप में साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा और समा के चावल से बनी चीजें खाई जा सकती हैं। सब्जियों में आलू, शकरकंद, लौकी, कद्दू, टमाटर, हरी मिर्च, हरी धनिया और अरबी का उपयोग किया जाता है। भोजन में नमक के रूप में केवल सेंधा नमक का ही प्रयोग करें और मसाले के नाम पर केवल जीरे का इस्तेमाल करें। दूसरी ओर, अनाज, दालें, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से पूरी तरह तौबा कर लें। लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर और गरम मसाले का प्रयोग भी व्रत के खाने में वर्जित है।
भगवान शिव की सरल और प्रभावी पूजा विधि
भोलेनाथ को प्रसन्न करना बेहद आसान है, क्योंकि वे सिर्फ एक लोटा जल अर्पित करने मात्र से ही अपने भक्तों पर कृपा बरसा देते हैं। सावन सोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने मन में भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। अब मंदिर में जाकर या घर पर ही शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल और ताजे बेलपत्र अर्पित करें। इसके बाद शिवलिंग का पंचामृत यानी दूध, दही, घी, शक्कर और शहद के मिश्रण से अभिषेक करें। अभिषेक के बाद फिर से शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराएं। भोलेनाथ को चंदन का तिलक लगाएं, धतूरा, भांग और धूप-दीप अर्पित करें। पूजा के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव को पंचामृत, सफेद रंग की मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाएं। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और सपरिवार या अकेले बैठकर पूरी आस्था के साथ शिव आरती गाएं।
शिव आरती और इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व
सावन सोमवार की पूजा का समापन भगवान शिव की आरती के बिना अधूरा माना जाता है। “ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा…” इस प्रसिद्ध आरती को गाने से घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और सकारात्मक हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से सावन के हर सोमवार को व्रत रखता है और विधि-विधान से शिव-पार्वती की पूजा करता है, उसके जीवन के सारे संकट टल जाते हैं। अविवाहित युवतियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं, वहीं सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। सावन का यह महीना आत्म-शुद्धि और मानसिक शांति का प्रतीक है। इसलिए इस दौरान किसी के प्रति मन में द्वेष न रखें, ज्यादा से ज्यादा समय भगवान के स्मरण में बिताएं और पूरी पवित्रता के साथ इस व्रत के नियमों का पालन करके महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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