भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की मुक्केबाज डेलगाडो सवानाह को एकतरफा अंदाज में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। पूरे मुकाबले में प्रीति ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और अपनी प्रतिद्वंद्वी को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। तीनों राउंड में उनका दबदबा साफ दिखाई दिया, जिसके बाद पांचों जजों ने सर्वसम्मति से उनके पक्ष में फैसला सुनाया। यह पहली बार है जब 22 वर्षीय प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में कोई पदक जीता और उन्होंने अपने पहले ही मेडल को गोल्ड में बदलकर भारतीय खेल प्रेमियों को गर्व का मौका दिया।
पूरे टूर्नामेंट में नहीं दी किसी प्रतिद्वंद्वी को मौका
प्रीति पवार का सफर शुरुआत से ही शानदार रहा। उन्होंने प्रतियोगिता के हर मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन किया और किसी भी प्रतिद्वंद्वी को हावी होने का अवसर नहीं दिया। पहले मुकाबले में उन्होंने मलावी की बॉक्सर को नॉकआउट कर अगले दौर में जगह बनाई। इसके बाद नॉर्दर्न आयरलैंड और जाम्बिया की मुक्केबाजों को भी एकतरफा मुकाबलों में हराकर फाइनल में प्रवेश किया। स्वर्ण पदक मुकाबले में भी उन्होंने वही लय बरकरार रखी। प्रीति की तेज गति, सटीक पंच और बेहतरीन रणनीति के सामने कनाडा की खिलाड़ी पूरे मुकाबले में संघर्ष करती नजर आई। उनके इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि वह इस समय भारत की सबसे मजबूत महिला मुक्केबाजों में से एक हैं।
भारत के पदक अभियान को मिली नई मजबूती
प्रीति पवार के स्वर्ण पदक ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदक अभियान को नई ऊर्जा दी है। इस जीत के साथ भारत ने बॉक्सिंग में अपना पहला स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद जैसमीन लंबोरिया ने भी गोल्ड जीतकर देश की उपलब्धि को और बड़ा बना दिया। अब भारत के खाते में कुल 7 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं, जिससे पदक तालिका में देश की स्थिति और मजबूत हुई है। भारतीय मुक्केबाजों का इस बार प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। कुल 14 भारतीय बॉक्सर प्रतियोगिता में उतरे, जिनमें से 10 फाइनल तक पहुंचे। यह आंकड़ा भारतीय बॉक्सिंग की लगातार बढ़ती ताकत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी मजबूत मौजूदगी को दर्शाता है।
लगातार सफलता से बढ़ रहा प्रीति का कद
प्रीति पवार पिछले कुछ वर्षों से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। उन्हें पहली बड़ी पहचान 2022 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद मिली थी। इसके बाद उन्होंने अंडर-22 एशियन चैंपियनशिप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने करियर की एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रीति इसी तरह प्रदर्शन करती रहीं तो आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भी भारत के लिए पदक जीतने की मजबूत दावेदार बन सकती हैं। उनकी इस सफलता ने युवा खिलाड़ियों को भी कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
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