उत्तर प्रदेश के आगरा से एक ऐसा हैरान कर देने वाला और अविश्वासी मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप सकती है। आमतौर पर जब किसी डॉक्टर द्वारा इंसान को मृत घोषित कर दिया जाता है, तो परिवार वाले उसकी अंतिम विदाई और अंतिम संस्कार की सभी आवश्यक तैयारियों में जुट जाते हैं। कुछ ऐसा ही वाकया आगरा की श्रीनगर कॉलोनी में देखने को मिला। यहां रहने वाली 65 वर्षीय शीला देवी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं और उनका इलाज बरेली के एक निजी अस्पताल में हो रहा था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था, जिसके बाद परिवार गहरे सदमे और शोक में डूब गया था। परिजन मृतका के शव को एम्बुलेंस के जरिए बरेली से आगरा लेकर पहुंचे, जहां घर पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लगा हुआ था। चारों तरफ मातम पसरा था और घर के आंगन में अंतिम संस्कार का सारा सामान भी मंगा लिया गया था, लेकिन किसे पता था कि किस्मत का खेल अभी कुछ और ही तय कर रहा है।
घटना का मुख्य मोड़: एम्बुलेंस से उतारते वक्त अचानक शरीर में हुई हलचल
यह चौंकाने वाली घटना बुधवार की रात करीब आठ बजे की है, जब बरेली से लाई गई एम्बुलेंस आगरा स्थित घर के बाहर रुकी। परिजन भारी मन से और रोते-बिलखते हुए शीला देवी के शव को वाहन से नीचे उतार रहे थे। तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद हर एक शख्स को सन्न कर दिया। मृत समझी जा रही शीला देवी के शरीर में अचानक हलचल महसूस हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, उन्होंने अचानक अपने भाई का हाथ मजबूती से पकड़ लिया। पहले तो लोगों को अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ और उन्हें लगा कि यह उनका कोई वहम या भ्रम होगा, लेकिन जब हलचल दोबारा स्पष्ट रूप से दिखाई दी, तो वहां सनसनी फैल गई। कुछ पलों के लिए घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जहां लोग डर और हैरानी के मिले-जुले अहसास के साथ समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर यह क्या हो रहा है।
अस्पताल की बड़ी लापरवाही या कोई दैवीय चमत्कार? डॉक्टरों ने कर दिया था मृत घोषित
इस पूरी घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर और सोशल मीडिया पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हर कोई इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहा है, तो वहीं दूसरी ओर बरेली के निजी अस्पताल की कार्यप्रणाली और डॉक्टरों की क्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या बरेली के डॉक्टरों ने बिना ठीक से जांच किए ही महिला को मृत घोषित कर दिया था? क्योंकि जिस तरह से महिला मौत के लगभग 17 घंटे बाद तक जीवित रही और उसने अपने शरीर में हरकत दर्ज कराई, वह मेडिकल साइंस के इतिहास में भी एक दुर्लभ और हैरान करने वाला विषय बन गया है। घटना की जानकारी फैलते ही देखते ही देखते बड़ी संख्या में आसपास के लोग और रिश्तेदार शीला देवी के घर पहुंचने लगे। परिवार में जहां एक तरफ भारी तनाव और उलझन का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ महिला के जीवित होने से एक उम्मीद की किरण और खुशी की लहर भी दौड़ पड़ी।
वर्तमान स्थिति: आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती, परिवार और डॉक्टरों की नजरें सेहत पर
जैसे ही परिजनों को अहसास हुआ कि शीला देवी की सांसें चल रही हैं, उन्होंने बिना एक पल भी गंवाए अत्यधिक तत्परता दिखाई। बिना किसी देरी के उन्हें तुरंत आगरा के एक स्थानीय निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत आपातकालीन उपचार शुरू कर दिया। वर्तमान में डॉक्टरों की देखरेख में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। आपको बता दें कि शीला देवी के दो बेटे हैं, जिनमें से एक आगरा में अपनी परचून की दुकान चलाते हैं और दूसरे बेटे बदायूं के एक प्राइवेट अस्पताल में कार्यरत हैं। परिवार के दोनों बेटे और अन्य रिश्तेदार इस वक्त भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी मां पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएं। फिलहाल, इस अनोखी घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है और यह मामला हर किसी की जुबान पर चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है।
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