हाल ही में देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं और खासकर नीट (NEET) पेपर लीक मामलों को लेकर सियासत पूरी तरह गरमाई हुई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक विशेष प्रेस वार्ता के जरिए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि देश का युवा आज गहरे संकट से गुजर रहा है और परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां किसी एक गलती का परिणाम नहीं, बल्कि एक गहरी व्यवस्थागत विफलता को दर्शाती हैं। राहुल गांधी ने अनशन पर बैठे मेधावी छात्रों से सीधी बातचीत करने के बाद सरकार के सामने तीन ऐसी सख्त मांगें रखी हैं, जिन पर विपक्ष और छात्र किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार को इस मामले पर पूरी जवाबदेही तय करनी होगी।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष
राहुल गांधी की सबसे पहली और प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से तत्काल हटाने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मेंद्र प्रधान इस पूरी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और नाकामी का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुके हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि सरकार के भीतर यह सुगबुगाहट चल रही है कि उन्हें केवल शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी अन्य विभाग में शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन छात्र और देश का विपक्ष इस तरह की लीपापोती को कभी स्वीकार नहीं करेगा। राहुल का मानना है कि यदि शिक्षा मंत्री अपने पद पर बने रहते हैं, तो निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद करना बेमानी होगा। इसलिए, नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उनका इस्तीफा देना ही इस दिशा में उठाया जाने वाला पहला और सबसे जरूरी कदम होना चाहिए।
छात्रों पर हुई कथित बर्बरता और पुलिस कार्रवाई पर कड़ा रुख
अपनी दूसरी बड़ी मांग रखते हुए राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हाल ही में हुई कथित पुलिस बर्बरता और बल प्रयोग का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठा रहे युवाओं पर लाठियां भांजना और उन्हें डराना सरकार की तानाशाही रवैये को उजागर करता है। विपक्ष की मांग है कि इस अमानवीय कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। छात्रों को न्याय दिलाने के बजाय उनका दमन करने की इस प्रवृत्ति को देश का युवा और समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा, और इस मामले में दोषियों को सजा मिलना अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री की माफी और भविष्य की राजनीतिक सरगर्मी
इस पूरे प्रकरण की तीसरी और सबसे अहम मांग देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी हुई है, जिनसे सार्वजनिक रूप से देश के युवाओं से माफी मांगने की बात कही गई है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि देश का भविष्य यानी उसके छात्र आज खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, ऐसे में देश के मुखिया होने के नाते प्रधानमंत्री को आगे आकर इस व्यवस्थागत नाकामी की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जैसे-जैसे यह विवाद गहराता जा रहा है, राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इस बार किसी भी आधे-अधूरे समाधान पर झुकने को तैयार नजर नहीं आ रहा है।








