दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि प्रदर्शनकारियों के लिए खाना लेकर जा रहे तीन युवकों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस दावे के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि, कुछ ही समय बाद दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया। पुलिस का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को खाना ले जाने से नहीं रोका गया और जो कार्रवाई हुई, वह केवल सामान्य जांच प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसी बयान के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
CJP ने लगाए गंभीर आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन स्थल पर भोजन पहुंचाने जा रहे तीन युवकों को रास्ते में रोककर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। उनके अनुसार इससे प्रदर्शनकारियों तक जरूरी सामान पहुंचने में परेशानी हुई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि संबंधित वाहन को केवल नियमित चेकिंग के लिए रोका गया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शहर में सुरक्षा व्यवस्था के तहत जगह-जगह पिकेट लगाए गए हैं, जहां वाहनों और यात्रियों की पहचान की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत वाहन को रोका गया था और किसी भी तरह की हिरासत जैसी कार्रवाई नहीं की गई।
जांच के दौरान क्या हुआ, पुलिस ने बताया पूरा घटनाक्रम
दिल्ली पुलिस के अनुसार, जब वाहन को रोका गया तो उसमें बैठे लोगों से उनकी पहचान और यात्रा के उद्देश्य के बारे में जानकारी ली गई। इसी दौरान वाहन चालक मौके से गाड़ी और उसमें रखा सामान लेकर चला गया। पुलिस का कहना है कि उस समय ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों को यह जानकारी नहीं थी कि वाहन में रखा भोजन जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के लिए ले जाया जा रहा था। बाद में पूछताछ के दौरान युवकों ने बताया कि वे प्रदर्शनकारियों तक खाना पहुंचाने जा रहे थे। पुलिस ने यह भी कहा कि वाहन चालक उन युवकों का परिचित नहीं था, बल्कि उसे किसी दोस्त के माध्यम से बुलाया गया था। इसलिए चालक के चले जाने को पुलिस कार्रवाई से जोड़ना सही नहीं है।
NEET आंदोलन के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक मामले को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच भोजन पहुंचाने वाले युवकों को लेकर सामने आए दावों ने आंदोलन को लेकर नई बहस शुरू कर दी। हालांकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून के तहत की गई सामान्य जांच को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित जांच करना उनकी जिम्मेदारी है और इसे किसी आंदोलन को रोकने की कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अब इस मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं, जबकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस लगातार जारी है।








