26 दिन बाद आखिर कैसे टूटा सोनम वांगचुक का अनशन? कौन-कौन सी शर्तें पर तैयार हुई सरकार? वीडियो में किए बड़े खुलासे

करीब 26 दिनों तक चले अनशन के बाद प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ( Sonam Wangchuk) ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर बताया कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से मिले आश्वासनों के आधार पर लिया गया है। वांगचुक ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग दलों के करीब 65 सांसद उनसे मिले। इन सांसदों ने लिखित रूप से भरोसा दिया कि वे संसद में NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े अन्य अहम मुद्दों को गंभीरता से उठाएंगे। इसी विश्वास के साथ उन्होंने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन यहीं खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब इसकी अगली लड़ाई जवाबदेही और सुधार की होगी।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी

सोनम वांगचुक ने अपने वीडियो में बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह भी उनसे मिलने पहुंचे थे। बातचीत के दौरान सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण भरोसे दिए गए। वांगचुक के अनुसार, सरकार ने कहा है कि 20 मार्च को हुए “संसद चलो” मार्च में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हुए लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं पर भी किसी तरह का मामला दर्ज नहीं होगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में गंभीरता से काम करने का भरोसा दिया है। साथ ही, हालिया NEET पेपर लीक मामले से प्रभावित परिवारों, खासकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित सहायता और मुआवजा देने का भी आश्वासन दिया गया है।

 वीडियो में भावुक दिखे वांगचुक

वीडियो में सोनम वांगचुक ने अनशन के दौरान मिले देशभर के लोगों के समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद किया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि 26 दिनों के बाद भोजन का स्वाद अलग ही महसूस होता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल अनशन करना नहीं था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग उठाना था। वांगचुक ने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि जो वादे किए गए हैं, वे सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें बल्कि जमीन पर भी दिखाई दें। उन्होंने लोगों से अपील की कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर समाज लगातार जागरूक रहे और सरकार से जवाबदेही मांगता रहे। उनका कहना था कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा अभियान है।

कोर्ट के आदेश से मेदांता किया गया शिफ्ट

लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। पहले उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे थे। बाद में उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने बेहतर इलाज की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर मानते हुए उन्हें मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा था कि उनकी हालत को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों की लगातार निगरानी जरूरी है। अब अनशन खत्म होने के बाद डॉक्टर उनकी रिकवरी पर नजर रखेंगे। वहीं, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार सांसदों और मंत्रियों द्वारा किए गए वादों को किस तरह अमल में लाती है और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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