50 साल बाद स्कूलों में पढ़ाया जाएगा लोकतंत्र का सबसे चर्चित दौर! NCERT के नए फैसले से क्यों बढ़ी चर्चा?

देश में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी NCERT ने पहली बार कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को शामिल किया है। नई पुस्तक का उद्देश्य छात्रों को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास, उसके संघर्षों और चुनौतियों से परिचित कराना है। अब तक आपातकाल का जिक्र उच्च कक्षाओं में सीमित रूप से देखने को मिलता था, लेकिन पहली बार इसे नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विस्तार से समझाने की कोशिश की गई है। किताब में बताया गया है कि भारतीय लोकतंत्र ने अपने सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और आपातकाल उन महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है जिसने देश की राजनीतिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को गहराई से प्रभावित किया था।

छात्रों को समझाया जाएगा लोकतंत्र और अधिकारों का महत्व

नई पुस्तक में लोकतंत्र की ताकत और उसके सामने आने वाली चुनौतियों पर विशेष अध्याय तैयार किया गया है। इसमें छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल चुनाव तक सीमित नहीं होती, बल्कि नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की मजबूती भी इसका अहम हिस्सा हैं। पुस्तक में बताया गया है कि आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को यह भी पढ़ाया जाएगा कि किसी भी लोकतंत्र की सफलता नागरिकों की जागरूकता और सहभागिता पर निर्भर करती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विषय छात्रों को देश के राजनीतिक इतिहास को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेंगे।

जयप्रकाश नारायण आंदोलन और 1977 के चुनावों का भी जिक्र

किताब में लोकनायक Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में चले जन आंदोलन को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। छात्रों को बताया जाएगा कि उस दौर में देश के कई हिस्सों में युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर आवाज उठाई थी। बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक भागीदारी के महत्व को समझाया गया है। इसके अलावा वर्ष 1977 में हुए आम चुनावों का भी जिक्र है, जिसमें जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की थी। पुस्तक यह संदेश देने की कोशिश करती है कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है और चुनाव उसकी सबसे बड़ी अभिव्यक्ति हैं।

मीडिया, फेक न्यूज और सामाजिक चुनौतियों पर भी विशेष फोकस

नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक केवल आपातकाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक लोकतंत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय भी जोड़े गए हैं। ‘Democracy and You’ नामक नए खंड के माध्यम से छात्रों को उनके नागरिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही मीडिया की भूमिका पर विशेष चर्चा करते हुए उसे लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया है। पुस्तक में फेक न्यूज, गलत सूचना, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता, गरीबी, क्षेत्रवाद और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन विषयों को शुरुआती स्तर पर पढ़ाने से विद्यार्थियों में सामाजिक और लोकतांत्रिक समझ विकसित होगी। शिक्षा जगत में इस बदलाव को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास और वर्तमान चुनौतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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