CBSE कॉपियों की जांच में क्या हुई बड़ी गड़बड़ी? राहुल गांधी के आरोपों ने खड़े किए कई सवाल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर नया विवाद सामने आया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें कई ऐसे छात्रों से मिलने का अवसर मिला जिन्होंने परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली में कथित अनियमितताओं की शिकायत की। छात्रों का दावा है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटलीकरण और मूल्यांकन के दौरान ऐसी तकनीकी समस्याएं सामने आईं, जिनका असर उनके परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक करते हुए कहा कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि इससे लाखों छात्रों का भविष्य जुड़ा होता है।

टेंडर प्रक्रिया में बदलाव को लेकर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग से जुड़ी प्रक्रिया में समय के साथ कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। उनके अनुसार, शुरुआती स्तर पर जारी की गई शर्तों में उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग तकनीक और स्वचालित मशीनों के उपयोग की बात कही गई थी। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं की स्पष्ट और सुरक्षित डिजिटल कॉपी तैयार करने के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों का भी उल्लेख किया गया था। लेकिन बाद में जारी दस्तावेजों में इन शर्तों में बदलाव देखने को मिला। राहुल गांधी का कहना है कि इन बदलावों के कारण स्कैनिंग की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और इससे मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे टेंडर और तकनीकी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं। इस मुद्दे ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच भी नई बहस छेड़ दी है।

डिजिटल स्कैनिंग प्रक्रिया पर बढ़ी चिंता

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटल रूप में बदलने की प्रक्रिया के दौरान आधुनिक स्कैनिंग उपकरणों के बजाय मोबाइल फोन का उपयोग किया गया। उनका दावा है कि इससे कई उत्तर पुस्तिकाओं की छवियां स्पष्ट नहीं बन पाईं और कुछ मामलों में पन्नों के ठीक से स्कैन न होने जैसी समस्याएं सामने आईं। यदि ऐसा हुआ है तो यह छात्रों के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रतियों के आधार पर किया जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी छात्र की मेहनत का सही आकलन तभी संभव है जब उसकी उत्तर पुस्तिका पूरी और स्पष्ट रूप से परीक्षक तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी खामियों का नुकसान छात्रों को नहीं उठाना चाहिए। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद कई छात्र और अभिभावक भी अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे हैं और चाहते हैं कि संबंधित संस्थाएं स्थिति स्पष्ट करें।

जांच और जवाबदेही की मांग हुई तेज

इस विवाद को और बल तब मिला जब एक छात्र शोधकर्ता की रिपोर्ट में डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और उससे जुड़े ठेका आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में कुछ ऐसे बिंदुओं का उल्लेख किया गया, जिन पर अब राजनीतिक और शैक्षणिक स्तर पर चर्चा हो रही है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत और उनके भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। दूसरी ओर, इस मुद्दे को लेकर विपक्ष पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है। वहीं छात्र और अभिभावक भी चाहते हैं कि संबंधित संस्थाएं पूरे मामले पर स्पष्ट जानकारी दें। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CBSE और संबंधित अधिकारी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या इस मामले में किसी प्रकार की आधिकारिक जांच शुरू की जाती है।

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